19 फरवरी 2026
बांग्लादेश में सत्ता संभालते ही, नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता — कानून-व्यवस्था की बहाली और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई होगी।अपने पहले टीवी संबोधन में उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य ऐसा बांग्लादेश बनाना है, जहां हर नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस करे — चाहे वह किसी भी धर्म, राजनीतिक विचारधारा या जातीय पहचान से आता हो। उन्होंने कहा कि “यह देश मुसलमान, हिंदू, बौद्ध और ईसाई — सभी का है और किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
तारिक रहमान की यह टिप्पणी इसलिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद देश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
इसके बाद अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्य काल में भी कई इलाकों में भीड़, हिंसा और अराजकता की शिकायतें बढ़ीं। मानवाधिकार संगठन MSF के मुताबिक जनवरी 2026 में भीड़ द्वारा हत्या की 21 और मारपीट की 28 घटनाएं दर्ज की गईं। बांग्लादेश में हिंदू, बौद्ध, ईसाई एकता परिषद ने साल 2025 में 522 सांप्रदायिक हमलों का रिकॉर्ड सामने रखा, जिनमें हत्याएं, बलात्कार और मंदिरों में तोड़फोड़ की घटनाएं शामिल हैं। जून 2025 से जनवरी 2026 के बीच 116 अल्पसंख्यक नागरिकों की मौत की पुष्टि भी की गई है।
इन्हीं हालात के बीच तारिक रहमान ने साफ कहा है कि “राजनीतिक दबाव नहीं, बल्कि कानून का शासन ही अंतिम फैसला करेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि उनकी सरकार आत्मनिर्भर, सुरक्षित और लोकतांत्रिक बांग्लादेश के निर्माण के लिए ठोस कदम उठाएगी।
तारिक रहमान की सरकार में गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने भी बड़ा बयान देते हुए कहा है कि देश में अब ‘मॉब कल्चर ’ यानी भीड़ तंत्र को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सत्तारूढ़ पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने भी पार्टी के भीतर अनुशासन पर सख्ती दिखानी शुरू कर दी है।
सिराजगंज में अल्पसंख्यकों की दुकानों में तोड़फोड़ और जबरन वसूली के आरोपों पर बीएनपी के तीन नेताओं को कारण बताओ नोटिस दिया गया, जबकि दो नेताओं को पार्टी से निलंबित किया गया है।
तारिक रहमान ने युवाओं, छात्रों और कारोबारियों को भी भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की रक्षा करेगी और शिक्षा, विज्ञान तथा रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जाएंगे। गौरतलब है कि तारिक रहमान दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं और 13वें संसदीय चुनाव में BNP को पूर्ण बहुमत दिलाकर प्रधानमंत्री बने हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या तारिक रहमान वाकई देश में बिगड़ चुकी कानून-व्यवस्था को काबू में ला पाएंगे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को ज़मीन पर सुनिश्चित कर पाएंगे?

















