गुरुग्राम में संत पर रोक ,प्रशासन ने क्यों ठुकराई सुरक्षा ,बहोडा कला में भंडारा टला

गुरुग्राम के बहोडा कला गांव में नवरात्रि के पहले दिन का माहौल अलग ही होने वाला था। गाँव में महामंडलेश्वर ज्योति गिरी जी महाराज का आगमन होना था और उनके सानिध्य में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाना था। लेकिन ऐन वक्त पर यह आयोजन टल गया। कारण है पटौदी प्रशासन। दरअसल, ज्योति गिरि महाराज के भक्तों और ग्रामीणों ने प्रशासन को पहले ही पत्र लिखकर मांग की थी कि बाबा के आगमन पर उचित सुरक्षा व्यवस्था करवाई जाए। लेकिन उपमंडल अधिकारी ने साफ इंकार कर दिया। उनका कहना था कि पुलिस, तहसीलदार और पंचायत विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बाबा के आने से गाँव में कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। इसलिए आयोजन की अनुमति नहीं दी जा सकती।अब यहाँ सवाल यह उठता है कि क्या हरियाणा पुलिस इतनी कमजोर हो गई है कि कुछ उपद्रवियों से निपटने के बजाय संत के आगमन को ही रोक दिया गया? क्या पटौदी प्रशासन किसी अदृश्य दबाव में काम कर रहा है? ज्योति गिरी महाराज कोई साधारण नाम नहीं हैं। उन्होंने बहोडा कला की जनता की सेवा के लिए जमीन खरीदी और वहाँ अस्पताल बनवाया। गाँव के गरीब और ज़रूरतमंद लोग इस अस्पताल से इलाज पाते थे। लेकिन जैसे ही बाबा गाँव से बाहर गए, कुछ प्रभावशाली लोगों ने मिलीभगत कर अस्पताल पर कब्ज़ा कर लिया। और धीरे-धीरे वहां का सारा सामान गायब होने लगा उसके बाद अस्पताल की इमारत को एक निजी संस्था को किराए पर दे दिया गया।

इस अन्याय के खिलाफ बाबा अदालत नहीं गए, लेकिन उन्होंने प्रशासन से बार-बार गुहार लगाई। लंबे संघर्ष के बाद प्रशासन को जमीन कब्ज़ा मुक्त करनी पड़ी। आधे दर्जन लोगों के खिलाफ नामजद FIR भी दर्ज हुई, लेकिन आज तक पुलिस ने किसी एक आरोपी को भी गिरफ्तार नहीं किया।एक तरफ पुलिस बाबा की जमीन पर कब्जा करने वालों और हॉस्पिटल का सामान गायब करने वालो पर कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। और दूसरी तरफ उसी गाँव में बाबा को भंडारा करने की भी इजाजत नहीं दे रही है। यह वही गाँव है जहाँ बाबा का आश्रम है, जहाँ उनकी जमीन है, और जहाँ वे सेवा के लिए आए थे।[ प्रशासन के इस रवैये से ग्रामीणों में गुस्सा है। उनका कहना है कि अगर साधु-संत को ही सुरक्षा नहीं मिल रही तो आम आदमी की क्या स्थिति होगी। कई ग्रामीण प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या जिला पुलिस और अधिकारी कुछ लोगों के इशारे पर काम कर रहे हैं।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पटौदी का प्रशासन एक साधु की सुरक्षा करने में भी असमर्थ है? और अगर साधु-संत को ही डर दिखाकर रोका जाएगा, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करें? यह सिर्फ बहोडा कला का मुद्दा नहीं है। यह सवाल पूरे हरियाणा और गुरुग्राम की सुरक्षा पर है। क्योंकि अगर प्रशासन निष्पक्ष नहीं है, तो फिर कानून व्यवस्था का भरोसा किस पर

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