गुरुग्राम ,पत्थरबाजी मामले में मेयर पति राकेश हयातपुर का बड़ा बयान

कभी भीड़ सच्चाई की आवाज़ होती है…
तो कभी वही भीड़ झूठ का हथियार बन जाती है।
लेकिन सवाल ये है—भीड़ की आड़ में असली गुनहगार कौन है?
और क्या निर्दोष को सिर्फ़ राजनीति की वजह से बलि का बकरा बनाया जा सकता है?
दोस्तो, ये कहानी है मानेसर की…
जहाँ DTP की टीम पर पत्थर चले, और नाम आया—मेयर पति राकेश हयातपुरिया का।
अब सच्चाई क्या है—पत्थर भीड़ ने चलाए या सियासत ने?”
घटना की शुरुआत8 सितंबर की सुबह, कांकरोला गाँव में DTP टीम अवैध निर्माण हटाने पहुँची।
गाँववाले भड़क उठे।
बोलचाल बढ़ा, गुस्सा बढ़ा… और अचानक पथराव शुरू हो गया।
जब संवाद की जगह टकराव ले ले, तो नतीजा हमेशा डरावना निकलता है।”
पुलिस ने FIR दर्ज की।
नामजद किए गए—मेयर पति राकेश हयातपुरिया,दो पार्षद,छह अन्य लोग,साथ ही अज्ञात ग्रामीणों के खिलाफ भी मुकदमा।
राकेश कहते हैं—मैं केवल ग्रामीणों के बुलावे पर वहाँ गया था।मैंने किसी को पत्थर चलाने के लिए नहीं कहा।ये पूरा केस मेरे खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र है।
ग्रामीणों और पार्षदों ने पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की।ज्ञापन सौंपकर कहा की इस मामले की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए,निर्दोष लोगों को बेवजह फँसाया न जाए।राकेश हयातपुरिया को सियासत का शिकार बनाया जा रहा है।
इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन लोगो को गिरफ्तार कर लिया है पुलिस कमिश्नर ने आदेश दिए कि जांच ACP स्तर पर होगी।
जब केस ACP तक पहुँच जाए, तो समझ लीजिए कहानी केवल कानून की नहीं, राजनीति की भी है।”
अब असली सवाल—किसने भीड़ को भड़काया? पत्थर किसने चलाए?FIR में जिन नेताओं का नाम है, उनका असली रोल क्या था?
राकेश का दावा है—राजनीतिक साज़िश के तहत फंसाया गया।
ग्रामीण कहते हैं—राकेश हमारे साथ खड़े थे।
प्रशासन कहता है—पत्थर चले और कानून तोड़ा गया।
मानेसर का मामला सिर्फ अवैध निर्माण या पथराव का नहीं।
ये मामला है नेताओं की साख, ग्रामीणों का भरोसा और कानून की ताकत का।
अब देखना ये है—सच किसके साथ खड़ा होगा।क्योकि बेसक मानेसर में पत्थरों ने दीवारें तोड़ी होंगी…लेकिन सबसे गहरी दरार भरोसे और राजनीति के बीच पड़ी है।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!