बिहार, 13 फरवरी 2026
बिहार की राजनीति में जुबानी जंग और सोशल मीडिया वार तेज हो गई है। बजट सत्र के दौरान सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) और विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल आमने-सामने आ गए हैं।
पूरा विवाद एक बयान से भड़का, जिसमें जेडीयू विधायक श्याम रजक ने लालू-राबड़ी के शासनकाल का जिक्र करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला किया।
बिहार विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत में श्याम रजक ने कहा—
“जंगल का जो जानवर होता है, अगर उसे शहर में ले आइएगा तो उसका मन नहीं लगेगा। जंगल में ही उसे अच्छा लगेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग “जंगलराज” से जुड़े रहे हैं, उन्हें आज का शासन शोभा नहीं देता, क्योंकि मौजूदा दौर में अमन-चैन है, कार्रवाई होती है, अपराधी पकड़े जाते हैं और सजा भी मिलती है।
जेडीयू विधायक ने यह भी माना कि राज्य में घटनाएं होती हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार, प्रशासन और पुलिस पूरी सक्रियता के साथ काम कर रही है और अपराध पर कार्रवाई हो रही है।
विपक्ष के इस आरोप पर कि 2005 से पहले भी गिरफ्तारियां होती थीं, तो उसे जंगलराज क्यों कहा जाता है—
इस पर श्याम रजक ने कहा कि वे खुद उस दौर का हिस्सा रहे हैं और अगर वे नाम लेने लगें, तो बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उस शासन में क्या-क्या होता था, इसकी जानकारी लोगों को खुद ले लेनी चाहिए।
इस बयान को सीधे तौर पर लालू-राबड़ी शासन पर हमला माना जा रहा है। जेडीयू के निशाने पर साफ तौर पर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी का दौर रहा।
इसी बीच सोशल मीडिया पर भी सियासी घमासान तेज हो गया।
आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर फेसबुक पोस्ट के जरिए हमला करते हुए उन्हें “जिंदा लाश” और “बेशर्म सीएम” कहा।
इस पर जेडीयू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पलटवार करते हुए बेहद कड़े शब्दों में जवाब दिया और आरजेडी के नेताओं पर राज्य को बर्बाद करने का आरोप लगाया।
इस पूरे विवाद में आरजेडी नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी खुलकर सामने आ गए।
तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल उठाए और कहा कि उनकी सेहत को लेकर गंभीर चिंता है।
तेजस्वी यादव ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री के व्यवहार और भाषा से यह साफ झलकता है कि वे अब राज्य चलाने की स्थिति में नहीं हैं।
विवाद तब और बढ़ गया जब बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने विधान परिषद में राबड़ी देवी को “लड़की” कहकर संबोधित किया।
इस पर विपक्ष भड़क गया और इसे महिलाओं के प्रति अपमानजनक बताया।
आरजेडी के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री की भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अब स्वस्थ नहीं हैं और उनकी भाषा का स्तर लगातार गिर रहा है।
आरजेडी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि बिहार में महिलाओं के खिलाफ अपराध और बलात्कार की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार चुप्पी साधे हुए है।
वहीं, जेडीयू का कहना है कि मौजूदा शासन में कानून-व्यवस्था पहले से बेहतर है और विपक्ष सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाने के लिए माहौल खराब कर रहा है।
इस पूरे सियासी संग्राम की पृष्ठभूमि में बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है, जहां महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सुशासन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है।
एक तरफ जेडीयू और उसका गठबंधन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन अपने शासन को सुशासन का मॉडल बता रहा है,
तो दूसरी ओर आरजेडी, नीतीश सरकार को पूरी तरह नाकाम बताते हुए सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक मोर्चा खोल चुकी है।
कुल मिलाकर, लालू-राबड़ी शासन बनाम नीतीश सरकार की बहस एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में लौट आई है,
और आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।

















