चुनाव एजेंट बीके हरिप्रसाद व भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को तत्काल हो गई थी। फिर सवाल उठता है
एक भी विधायक यह कहने की स्थिति में नही रहा कि उसने क्राॅस वोटिंग नही की।
चंडीगढ़, 20 मार्च-
स्वयंसेवी संस्था ग्रामीण भारत के अध्यक्ष वेदप्रकाष विद्रोही ने एक बयान में कहा कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि कांग्रेस न तो समय पर निर्णय करती है और और न ही समय पर बोलती है। कांग्रेस समय निकलने के बाद लाठी पीटकर अपनी भद खुद ही पिटवाती है। विद्रोही ने इसका ताजा उदाहरण हरियाणा राज्यसभा में कांग्रेसी विधायकों की क्राॅस वोटिंग को बताया। यह सभी जानते है कि राज्यसभा चुनाव में हर राजनीतिक दल के विधायक को अपना वोट डालने से पहले अपना मत पत्र अपने दल के चुनाव एजेंट को दिखाना कानूनी रूप से अनिवार्य है ताकि संबंधित दल को पता हो कि उसके विधायक ने किस राज्यसभा उम्मीदवार को अपना वोट दिया है। स्वभाविक है कि 16 मार्च को हरियाणा कांग्रेस के जिन विधायकों ने कांग्रेस उम्मीदवार को वोट देने की बजाय भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में वोट दिया था, उसकी जानकारी चुनाव एजेंट बीके हरिप्रसाद व भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को तत्काल हो गई थी। फिर सवाल उठता है कि क्राॅस वोटिंग करने वाले विधायकों के नाम दो दिन तक क्यों नही बताये?
कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने न केवल दो दिन लगा दिये
विद्रोही ने कहा कि 16 मार्च को ही ओडिसा में भी कांग्रेस के तीन विधायकों ने क्राॅस वोटिंग करके कांग्रेस के साथ धोखाधडी की थी, लेकिन ओडिसा कांग्रेस ने मतदान की समय सीमा खत्म होने से एक घंटे पहले ही क्राॅस वोटिंग करने वाले तीनों कांग्रेस विधायकों के नाम तत्काल बताकर उन्हे नेमषेम कर दिया और एक भी विधायक यह कहने की स्थिति में नही रहा कि उसने क्राॅस वोटिंग नही की। वहीं हरियाणा मंे जो काम 16 मार्च की सांय 4 बजे हो जाना चाहिए था, उसे बताने में हरियाणा कांग्रेस प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने न केवल दो दिन लगा दिये अपितु क्राॅस वोटिंग करने वाले पांच विधायकों में से 4 विधायकों के नाम बताये और एक विधायक का नाम नही बताया। अब यह सवाल तो उठेगा ही कि जब क्राॅस वोटिंग 5 विधायकों ने की, तब 4 विधायकों के नाम क्यों बताये गए?
इन कांग्रेसी विधायकों को यह अवसर क्यों और किसने दिया?
विद्रोही ने कहा कि उचित समय पर नाम न बताने के कारण ही क्राॅस वोटिंग करने वाले विधायक मोट माल लेकर कांग्रेस से गद्दारी भी कर गए और बाद में मीडिया में बयान बहादुर बनकर दावा भी कर रहे है कि उन्होंने क्राॅस वोटिंग नहीं की। सवाल उठता है कि क्राॅस वोटिंग करने वाले इन कांग्रेसी विधायकों को यह अवसर क्यों और किसने दिया? 16 मार्च को ही इनके नाम उजागर क्यों नही किये गए? विद्रोही ने कहा कि कांग्रेस के क्या ओडिसा व हरियाणा के लिए अलग-अलग पार्टी नियम है? पार्टी परम्परा व नियम जो ओडिसा के लिए है, वही हरियाणा के लिए भी है। कांग्रेस के इसी ढुलमुल, टरकाऊ, छिपाऊ, दबाऊ रवैये के चलते कांग्रेस न केवल हरियाणा में हंसी का पात्र बनी हुई है बल्कि हर नेता मनमाना बयान देकर कांग्रेस को षर्मसार भी कर रहा है।

















