1 सितंबर /भारत-नेपाल की दोस्ती और रिश्तों का इतिहास सदियों पुराना है। चाहे धार्मिक, सांस्कृतिक या पारिवारिक संबंध हों, दोनों देशों के बीच एक विशेष नजदीकी हमेशा रही है। इसी रिश्ते को मजबूत करने वाला सबसे अहम कदम 31 जुलाई 1950 को उठाया गया था, जब भारत और नेपाल के बीच शांति और मित्रता संधि पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते ने दोनों देशों के रिश्तों को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया और आज भी उसी के आधार पर भारत-नेपाल की खुली सीमा (Open Border) कायम है।इस संधि के तहत भारत और नेपाल ने एक-दूसरे के साथ खुले बॉर्डर की व्यवस्था स्वीकार की। यानी दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा और पासपोर्ट के एक-दूसरे के देश में आ-जा सकते हैं, रह सकते हैं, व्यापार कर सकते हैं और यहां तक कि नौकरी भी कर सकते हैं। इसके अलावा इस संधि में यह प्रावधान भी किया गया कि दोनों देश एक-दूसरे की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान करेंगे और किसी भी तीसरे देश से खतरे की स्थिति में मिलकर रक्षा करेंगे।
क्यों है बॉर्डर खुला?
नेपाल भारत से चारों तरफ से जुड़ा हुआ है। भौगोलिक और आर्थिक तौर पर नेपाल काफी हद तक भारत पर निर्भर है। पेट्रोल, डीजल, खाद्यान्न से लेकर रोजमर्रा की ज्यादातर जरूरतें भारत से नेपाल जाती हैं। वहीं नेपाल की बड़ी आबादी रोजगार और शिक्षा के लिए भारत पर निर्भर करती है। यही वजह है कि दोनों देशों ने 1950 में फैसला किया कि सीमाओं पर दीवारें खड़ी करने के बजाय, रिश्तों को और मजबूत किया जाए।आज हालात ये हैं कि नेपाल के नागरिक बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मुंबई और अन्य राज्यों में स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। वहीं भारतीय नागरिक भी नेपाल में व्यापार, होटल व्यवसाय और अन्य क्षेत्रों में सक्रिय हैं।इस खुले बॉर्डर से दोनों देशों के करोड़ों लोगों को सुविधा मिली है। परिवार बिना रोक-टोक के एक-दूसरे से मिलते हैं, व्यापार आसान है और रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। आतंकवाद, तस्करी, नकली करेंसी और अवैध गतिविधियों के लिए इस ओपन बॉर्डर का कई बार दुरुपयोग हुआ है। भारत में कई आतंकी घटनाओं की साजिश नेपाल से घुसपैठ कर आने वाले लोगों ने रची थी। यही कारण है कि समय-समय पर बॉर्डर पर निगरानी कड़ी की जाती है।
आज की स्थिति
1950 की यह संधि आज भी लागू है। हालांकि नेपाल में कई बार इस पर बहस उठी कि यह समझौता भारत के पक्ष में ज्यादा झुका हुआ है। वहां की राजनीति में यह मुद्दा समय-समय पर गूंजता रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि इस संधि ने दोनों देशों के रिश्तों को जोड़ा रखा है और लाखों परिवारों को करीब लाया हैभारत और नेपाल का खुला बॉर्डर सिर्फ एक राजनीतिक या कानूनी समझौते का नतीजा नहीं है, बल्कि सदियों से चले आ रहे साझा इतिहास और रिश्तों का प्रतीक है। वीजा-पासपोर्ट की जरूरत न होना दोनों देशों के बीच भरोसे की निशानी है। हालांकि सुरक्षा की चुनौतियां हैं, लेकिन इन सबके बावजूद 1950 का यह समझौता भारत-नेपाल संबंधों की नींव है और शायद यही कारण है कि दुनिया की बाकी सीमाओं के मुकाबले भारत-नेपाल बॉर्डर आज भी इंसानियत और रिश्तों का पुल है।

















