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July 22, 2026 7:09 am

नेपाल की सत्ता चलाएंगे पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह !

भगवान बुद्ध को जन्म देने वाला नेपाल आज जल रहा है  एक समय नेपाल  शांति, करुणा और सह अस्तित्व का प्रतीक कहलाया। लेकिन आज वही नेपाल उथल-पुथल में है। तख्तापलट हो चुका है, सेना ने मोर्चा संभाल लिया है और राजधानी काठमांडू से लेकर छोटे कस्बों तक—हर जगह एक ही सवाल गूंज रहा है ,,,अब आगे नेपाल का रास्ता क्या होगा?2008 में जब नेपाल में राजशाही ख़तम हुई थी तब लोकतंत्र की उम्मीद बंधी थी। लेकिन सालो बाद यह उम्मीद भी टूट गई।भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और असफल नेतृत्व ने जनता को निराश किया। यही वजह है कि नेपाल में एक बार फिर राजशाही की वापसी की आवाज बुलंद हो रही है।मार्च में जब काठमांडू की सड़कों पर हजारों लोग उतरे और नारे गूंजे।
राजा वापस आओ, देश बचाओ
हमारा प्यारा राजा अमर रहे!
इस आवाज के बाद साफ हो गया कि हालात अब सामान्य आंदोलन से आगे निकल चुके हैं।पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह ,जो पिछले 16 सालों से एक आम नागरिक की तरह रह रहे थे अचानक सक्रिय हो गए हैं। मार्च में वे पोखरा से काठमांडू लौटे, हजारों समर्थकों ने स्वागत किया।मई में अपने परिवार और पोते हृदयेन्द्र के साथ नारायणहिती महल पहुंचे, पूजा की और संदेश दिया कि शाही परिवार अभी भी मौजूद है।अलग-अलग मंदिरों में जाकर जनता का मूड टटोलते रहे।
सवाल _क्या यह सिर्फ धार्मिक यात्राएँ थी या राजनीतिक संकेत? सवाल यही है। 
शाही परिवार अब कहा है ,राजमाता रत्ना अभी भी महेंद्र मंजिल में रहती हैं। युवराज पारस का जीवन विवादों में रहा, लेकिन उनका नाम आज भी जनता के बीच गूंजता है।राजकुमारी हिमानी और उनकी बेटियाँ विदेश में सिंगापुर में बस गईं।यानि शाही परिवार बिखरा हुआ है, लेकिन जनता की भावनाओं में आज भी राजा के लिए जगह है।ऐसी हालत क्यों पैदा हुए। लोकतंत्र से उम्मीदें टूटीं।हर सरकार ने जनता को निराश किया।बढ़ती बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने गुस्सा बढ़ाया।सोशल मीडिया बैन ने चिंगारी को आग बना दिया।सरकार की सख्ती में 19 लोगों की मौत हुई। यही वो पल था जब जनता का गुस्सा फट पड़ा। संसद, सिंह दरबार और लोकतांत्रिक संस्थाएं आग में झुलस गईं।आज नेपाल में सेना ने सत्ता संभाल ली है। स्थिति को सामान्य करने की कोशिश जारी है। लेकिन सेना सिर्फ कानून-व्यवस्था संभाल सकती है, भविष्य की राह तय नहीं कर सकती
अब नेपाल दो रहे पर है क्या सेना नया लोकतान्त्रिक सिस्टम खड़ा करेगी या जनता की मांग पर राजशाही की वापसी होगी। क्या नेपाल फिर से हिन्दू राष्ट्र बनेगा ?क्योंकि इतिहास गवाह है जनता की उम्मीद टूटती है तब पुरानी वयवस्था की ओर

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