गुरुग्राम में साइबर ठगी का भंडाफोड़, क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर चल रहा था फर्जी कॉल सेंटर, 5 गिरफ्तार

  • क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठगी करने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़
  • 01 महिला सहित 05 आरोपी गिरफ्तार,पिछले 05 महीने से कर रहे थे साइबर ठगी
  • पुलिस से बचने के लिए आरोपी 10 से 15 दिन के बाद बदल लेते थे ठिकाना

गुरुग्राम : 06 जून 2026

11.03.2026 को एक व्यक्ति ने थाना साइबर अपराध दक्षिण, गुरुग्राम में एक शिकायत क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर इसके पास एक लिंक भेज कर इसके क्रेडिट कार्ड से लगभग 28 हजार रुपए की ठगी करने के संबंध में दी। शिकायत पर थाना साइबर दक्षिण, गुरुग्राम में संबंधित धाराओं के तहत अभियोग अंकित किया गया।

गौरव फोगाट सहायक पुलिस आयुक्त साइबर, गुरुग्राम के निर्देशन पर निरीक्षक नवीन कुमार, प्रबंधक थाना साइबर दक्षिण, गुरुग्राम की पुलिस टीम ने कार्यवाही करते हुए उपरोक्त अभियोग में 05.06.2026 को 01 महिला सहित 05 आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान राहुल (उम्र-33 वर्ष शिक्षा-12वीं) निवासी बलजीत नगर,दिल्ली, 2. अनुजपाल (उम्र-20 वर्ष शिक्षा-12वीं) निवासी इन्द्रपुरी,दिल्ली, 3. गौरव (उम्र-24 वर्ष शिक्षा-12वीं) निवासी इन्द्रपुरी,दिल्ली,4. मुकुल किरार (उम्र-22 वर्ष शिक्षा-12वीं) निवासी इन्द्रपुरी,दिल्ली व 5. आँचल (उम्र-21 वर्ष, शिक्षा-12वीं) निवासी तिलकनगर,दिल्ली के रूप में हुई है।

पुलिस पूछताछ में ज्ञात हुआ कि उपरोक्त आरोपी क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर ठगी की वारदातों को अंजाम देते हैं। उपरोक्त आरोपी यह काम एक अन्य व्यक्ति (मुख्य आरोपी) के कहने पर करते हैं इसके बदले उपरोक्त आरोपियों को सैलरी मिलती है। कॉल करने के लिए डाटा उपरोक्त आरोपियों को एक अन्य व्यक्ति (मुख्य आरोपी) उपलब्ध कराता है जिसके बाद ये क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर किसी व्यक्ति को कॉल करते हैं तथा उसके पास फर्जी लिंक भेजकर क्रेडिट कार्ड से ऑनलाइन सामान खरीद लेते हैं तथा उस समान को मुख्य आरोपी को दे देते हैं अगर सामान की कीमत 05-07 हजार होती है तो वह उसको बेचकर रुपए प्राप्त कर लेते हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि उपरोक्त आरोपी कॉल सेंटर जनवरी 2026 से चला रहे थे। उपरोक्त आरोपी ठगी की वारदातों को अंजाम देते तथा उसके बाद दो-तीन दिन अपना सारा काम बंद कर देते थे तथा उसके बाद फिर से ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। आरोपी पुलिस से बचने के लिए 10 से 15 दिन में अपनी जगह बदल लेते थे। उपरोक्त अभियोग में मुख्य आरोपी उपरोक्त आरोपियों को डाटा उपलब्ध करवाता था तथा ठगी होने के पश्चात नया डाटा दे देता था तथा पुराना डाटा वापस ले लेता था।

आगामी पूछताछ व बरामदगी के लिए आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस हिरासत रिमांड पर लिया जाएगा। अभियोग अनुसंधानाधीन है।

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