ऐतिहासिक शहर फर्रुखनगर को उप मंडल का दर्जा देकर, इलाके का मान बढ़ाने का कार्य करे नायब सरकार- नीरू शर्मा।
फरुखनगर को उप मंडल का दर्जा दिए जाने की मांग एक सपना
गुरुग्राम ,फरुखनगर। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कुशल नेतृत्व में मार्ग दर्शन व दिशा निर्देश पर हरियाणा प्रदेश में विकास प्रगति के पथ पर है। उनके कुशल नेतृत्व में सरकार प्रदेश के अंतिम छोर तक प्रत्येक व्यकित को विकास की धारा में लाने के लिए कटिबद्ध है। लेकिन हैरत की बात यह है कि आज भी कुछ बिंदू है, जहां हरियाणा जैसे प्रगतिशील राज्य के जिला गुरुग्राम जैसे विश्वस्तरीय जिले का हिस्सा होने के बावजूद भी फरुखनगर जैसा ऐतिहासिक ब्लॉक विकास की मुख्यधारा से अछुता है। गत दो दशक से बीजेपी के प्रत्यासियों को अपना वोट देकर लोकसभा व विधानसभा भेजने के बावजूद इलाके की दशकों पुरानी मांग फरुखनगर को उप मंडल का दर्जा दिए जाने की मांग एक सपना बन कर रह गई है। गुरुयाम के सांसद एंव केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह के आग्रह पर पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल सरकार द्वारा फरुखनगर को उप मंडल दिलाने की मुहिम उच्च स्तर तक पहुंचाई गई थी। राव द्वारा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी पत्र लिखकर मांग उठाई गई है। इलाके की जनता को पूर्ण श्विास है कि उनके चुने गए सांसद व विधायक 22 मार्च को हल्का पटौदी व हल्का बादशाहपुर में होने वाली मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की रैली में फरुखनगर को उप मंडल का दर्जा दिलवाने में भरपूर कौशिस करेंगे।
मुगलकाल में उदय हुए ऐतिहासिक शहर फरुखनगर को उप मंडल के दर्जे से वंचित रखा गया है।
पूर्व नगर पार्षद नीरू शर्मा ने बताया कि फरुखनगर ब्लाक का देश की आजादी, जिले के विकास, प्रदेश के मानसम्मान में अहम किरदार रहा है। जिला गुरुग्राम में चार ब्लॉक फरुखनगर, सोहना, पटौदी, हरियाणा सरकार द्वारा जिला गुरुग्राम में ब्लॉक पटौदी, सोहना, गुरुग्राम, यहां तक कि गांव बादशाहपुर की भी उप मंडल का दर्जा देकर सम्मानित किया गया है। इतना ही नहीं जिला के गांव कादीपुर, हरसरू को भी उप तहसील के दर्जे से नवाजा गया है। जो प्रदेश सरकार द्वारा लिया गया एक सरहानिये कदम है। लेकिन जिला गुरुग्राम के मुगलकाल में उदय हुए ऐतिहासिक शहर फरुखनगर को उप मंडल के दर्जे से वंचित रखा गया है। जो इस क्षेत्र की जनता की राजनितिक उपेक्षा को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि मुगल काल में करीब 1718 में फरुखनगर शहर का उदय हुआ था। यहां के नवाब अहमदअली, क्षेत्र, के रणबाकुरों ने अंग्रेजी हकुमत के दौरान देश की आजादी के लिए 1857 में चलाए गए देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में बढचढ का हिस्सा लिया और शहादत भी दी। फरुखनगर शहर व आपपास के ग्रामीण आंचल में सेना के लिए हथियार बनाने का कार्य किया जाता था। यहां पर नमक बनाने के लिए बडे कारखाने हुआ करते थे। इस बात का इतिहास गवाह है। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी हकुमत के दौरान नमक के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए फरुखनगर -दिल्ली के बीच रेलवे लाईन बिछा कर माल गाडी से नमक को देश के विभिन्न कोनों में भेजा जाता था। इस रेल मार्ग पर आज भी यात्रियों व माल गाडी चलाई जाती है जो वर्तमान में आटीमोवाईल लोजिसटिक हब में विकसित हो चुका है। फरुखनगर किसान, कमेरी, पशुपालकों का क्षेत्र है। पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल ने फरुखनगर को खंड का दर्जा व पिछडा उदयोग क्षेत्र, पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला ने फरुखनगर को उप तहसील के दर्जे से नवाजा गया था। चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार में फरुखनगर को तहसील के दर्जे से नवाजा गया था। लेकिन बीजेपी की सरकार के कार्यकाल में फरुखनगर इलाके को ऐसा कोई तोफा नहीं दिया गया। जिससे क्षेत्र की जनता आपकी सरकार का सदैव गुणगान कर सके। फरुखनगर ब्लाक के अंर्तगत 53 ग्राम पंचायते, 550 से अधिक छोटी बडी ढाणियों व ऐतिहासिक शहर फरुखनगर सहित करीब चार लाख की आबादी को अपने आगोस में समेटे हुए है। फरुखनगर क्षेत्र कृषि, दुग्ध, मुढडा, वेयर हाउस जोन, उदयोगिक जोन होने के बावजूद भी राजनितिक उपेक्षा का शिकार है।

















