कर्नाटक में सियासी बयानबाज़ी तेज, प्रियांक खरगे का आरएसएस पर तीखा हमला

कर्नाटक,16 फरवरी 2026

कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली है। राज्य सरकार के आईटी मंत्री प्रियांक खरगे ने सार्वजनिक मंच से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे “शैतान” बताया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उसकी “छाया” करार दिया।

एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस के बिना भाजपा की राजनीतिक स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने दावा किया कि यदि आरएसएस का समर्थन न हो, तो भाजपा की हालत क्षेत्रीय दलों से भी खराब हो सकती है। उन्होंने कहा कि देश में आज असली समस्या की जड़ तक जाने की जरूरत है और केवल उसके प्रभाव से नहीं, बल्कि मूल स्रोत से लड़ना जरूरी है।

खरगे ने आरएसएस की फंडिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए और कहा कि संगठन अपने धन के स्रोतों को लेकर पारदर्शिता नहीं दिखाता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब आम नागरिकों और संस्थाओं को टैक्स देना पड़ता है और हर लेन-देन का हिसाब देना होता है, तो आरएसएस को इससे अलग क्यों रखा जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस से जुड़े 2,500 से अधिक संगठनों का एक बड़ा नेटवर्क देश और विदेश में फैला हुआ है और संगठन की फंडिंग को लेकर गंभीर संदेह हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना ठोस जवाब दिए कोई भी संस्था संवैधानिक जवाबदेही से नहीं बच सकती।

कानूनी स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि आरएसएस एक अपंजीकृत संगठन है और उसे कानून तथा संविधान के दायरे में आकर पंजीकरण कराना चाहिए। उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के पुराने बयान का हवाला देते हुए कहा कि जब संगठन खुद को “व्यक्तियों का समूह” बताता है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या उस पर भी क्लब और एसोसिएशन की तरह कानूनी नियम लागू नहीं होने चाहिए।

खरगे ने यह भी कहा कि जब तक आरएसएस संविधान और कानून के तहत पंजीकृत नहीं होता, तब तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ संवैधानिक और कानूनी तरीके से ऐसी सभी साम्प्रदायिक ताकतों पर कार्रवाई संभव है, चाहे वह आरएसएस हो या सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया

धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण का स्वरूप अलग है, जबकि आज के समय में धर्म की व्याख्या अलग तरीके से की जा रही है। उनके अनुसार, धर्म के नाम पर हिंसा को बढ़ावा देना उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर भी आरोप लगाया कि वह सार्वजनिक और निजी मंचों पर अलग-अलग बातें करती है और उसकी नीतियों का सीधा असर गरीब परिवारों पर पड़ता है।

प्रियांक खरगे ने यह भी कहा कि अगर आरएसएस का समर्थन न हो, तो भाजपा की राजनीतिक ताकत जनता दल (सेक्युलर) जैसे क्षेत्रीय दलों से भी कमजोर हो सकती है। कुल मिलाकर, कर्नाटक की राजनीति में आरएसएस की फंडिंग, कानूनी स्थिति और संवैधानिक जवाबदेही को लेकर प्रियांक खरगे के बयानों से नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है।

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