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July 22, 2026 8:20 am

परियोजनाओं में देरी को लेकर सख्त हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्रशासनिक सचिव स्तर पर गहन समीक्षा के दिए निर्देश नई दिल्ली 09 सितम्बर-हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में चलाई जा रही कई परियोजनाओं के पूरा होने में हो रहे विलम्ब को गम्भीरता से लेते हुए निर्देश दिए हैं कि ऐसी सभी परियोजनाओं की प्रशासनिक सचिवों के स्तर पर गहन समीक्षा की जाए।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग का दायित्व भी है, ने इस सम्बन्ध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों व निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडलायुक्तों तथा उपायुक्तों को एक पत्र जारी किया है।

परियोजनाओं में देरी को लेकर सख्त हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

प्रशासनिक सचिव स्तर पर गहन समीक्षा के दिए निर्देश

नई दिल्ली 09 सितम्बर-हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में चलाई जा रही कई परियोजनाओं के पूरा होने में हो रहे विलम्ब को गम्भीरता से लेते हुए निर्देश दिए हैं कि ऐसी सभी परियोजनाओं की प्रशासनिक सचिवों के स्तर पर गहन समीक्षा की जाए।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग का दायित्व भी है, ने इस सम्बन्ध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्डों व निगमों के प्रबंध निदेशकों, मंडलायुक्तों तथा उपायुक्तों को एक पत्र जारी किया है।

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने विभागों या संस्थाओं की ’चल रही परियोजनाओं एवं मध्यस्थता मामलों’ की व्यापक समीक्षा करें। साथ ही, विभागों को अधूरी अथवा लंबित परियोजनाओं का विवरण निर्धारित प्रपत्र में भेजने को कहा गया है, जिसमें ’वित्तीय प्रभाव, विलंब के कारण, जवाबदेही तथा शीघ्र पूर्णता के लिए उपाय’ स्पष्ट रूप से दर्शाए जाएँ। ’लंबित बजट घोषणाओं’ और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है।

एक अन्य पत्र में विभागों से कहा गया है कि वे ’निर्माण कार्यों से संबंधित सभी लंबित मध्यस्थता मामलों’ का ब्यौरा भी प्रस्तुत करें। इसमें परियोजना का विवरण, ठेकेदार या एजेंसी का नाम, वित्तीय दायित्व, गत तीन वर्षों में हुए मध्यस्थता निर्णय एवं उनका राज्य पर वित्तीय प्रभाव सम्मिलित होगा। प्रत्येक विभाग को प्रशासनिक सचिव द्वारा अनुमोदित एक ’संक्षिप्त टिप्पणी’ भी संलग्न करनी होगी, जिसमें विषय की गंभीरता, संभावित त्रुटियाँ, मुख्य चिंताएँ एवं ’आगे की कार्ययोजना’ का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिए।
इस उद्देश्य के लिए इंजीनियर-इन-चीफ की एक समिति भी गठित की गई है, जो इन मामलों की समीक्षा कर उचित सिफारिशें देगी ताकि राज्य को अनावश्यक विलंब और वित्तीय दायित्वों से बचाया जा सके।

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