August 24, 2026 7:28 am

गुरुग्राम में वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा, 100 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनेंगे

गुरुग्राम में वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज को मिलेगा बढ़ावा, 100 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम बनेंगे

पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणामों के बाद जीएमडीए का बड़ा फैसला, एनएच-48 के दोनों ओर 50-50 नए सिस्टम स्थापित किए जाएंगे

गुरुग्राम, 20 अगस्त। गुरुग्राम में वर्षा जल का बेहतर उपयोग करने, भूजल स्तर को रिचार्ज करने और बारिश के दौरान जलभराव व सतही जल बहाव को कम करने की दिशा में गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए ) ने बड़ी पहल की है। पायलट प्रोजेक्ट के उत्साहजनक परिणामों के बाद जीएमडीए ने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग (आरडब्ल्यूएच ) सिस्टम स्थापित करने का निर्णय लिया है। इनमें से 50 सिस्टम एनएच-48 के पूर्वी हिस्से और 50 सिस्टम पश्चिमी हिस्से में बनाए जाएंगे।जीएमडीए की ओर से पांच रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का पायलट प्रोजेक्ट नई तकनीक के आधार पर किया जा रहा है। यह परियोजना कनाडा स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू के फैकल्टी सदस्य एवं एएनआरएफ रामानुजन फेलो डॉ. पंकज कुमार गुप्ता के सहयोग से संचालित की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी नई तकनीक पर आधारित इस पायलट प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया था।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य बारिश के पानी को सीधे बह जाने से रोककर उसे वैज्ञानिक तरीके से जमीन में पहुंचाना है। इससे एक ओर सतही जल बहाव और जलभराव कम होगा, वहीं दूसरी ओर भूजल रिचार्ज को बढ़ावा मिलेगा। इन संरचनाओं की प्रभावशीलता को मापने के लिए फ्लोमीटर लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से यह रिकॉर्ड किया जा रहा है कि प्रत्येक सिस्टम के जरिए कितनी मात्रा में पानी रिचार्ज किया जा रहा है।

 

सेक्टर-31 के पायलट सिस्टम की सीईओ ने की समीक्षा

जीएमडीए के सीईओ  पीसी मीणा ने सेक्टर-31 में बनाए गए पायलट रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निरीक्षण कर इसकी कार्यप्रणाली और प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान जीएमडीए के मुख्य अभियंता हेमंत कुमार और कार्यकारी अभियंता  शेखर नांदल के साथ पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों तथा इसे पूरे गुरुग्राम में विस्तार देने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई।

पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों को उत्साहजनक बताते हुए सीईओ श्री मीणा ने शहर में 100 अतिरिक्त रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के निर्देश दिए। इनका चयन ऐसे स्थानों पर किया जाएगा, जहां बारिश के पानी के सतही बहाव को प्रभावी ढंग से रोककर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में पहुंचाया जा सके।

7.20 लाख लीटर पानी हुआ रिचार्ज

पायलट प्रोजेक्ट की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 7 अगस्त 2026 को हुई बारिश के दौरान सेक्टर-31 स्थित जीएमडीए के रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के माध्यम से फ्लोमीटर रीडिंग के अनुसार लगभग 7.20 लाख लीटर वर्षा जल को संग्रहित कर जमीन में रिचार्ज किया गया।

फ्लोमीटर से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर जीएमडीए प्रत्येक सिस्टम की वास्तविक क्षमता और प्रदर्शन का आकलन करेगा। इससे भविष्य में स्थापित किए जाने वाले सिस्टम की क्षमता, डिजाइन और स्थान निर्धारित करने में वैज्ञानिक एवं डेटा आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

एनएच-48 के दोनों ओर बनेगा नेटवर्क

प्रस्तावित 100 नए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में 50 सिस्टम एनएच-48 के पूर्वी हिस्से और 50 पश्चिमी हिस्से में स्थापित किए जाएंगे। इनका उद्देश्य शहर में वर्षा जल रिचार्ज का एक व्यापक नेटवर्क तैयार करना है। विशेष रूप से तेज बारिश के दौरान बड़ी मात्रा में पानी सड़कों और अन्य पक्की सतहों से बहकर निकल जाता है। ऐसे स्थानों पर पानी को इंटरसेप्ट कर हार्वेस्टिंग सिस्टम तक पहुंचाया जाएगा, जिससे ड्रेनेज नेटवर्क पर दबाव भी कम होगा।यह पहल जीएमडीए के सतत जल प्रबंधन, भूजल संरक्षण, वर्षा जल के सतही बहाव को कम करने और शहर के ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

आईसीसीसी से ऑनलाइन होगी निगरानी

सीईओ  पीसी मीणा ने बताया कि सभी हार्वेस्टिंग सिस्टम में लगाए गए फ्लोमीटर को जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी ) से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से प्रत्येक हार्वेस्टिंग सिस्टम से गुजरने वाले पानी की मात्रा की ऑनलाइन निगरानी और ट्रैकिंग की जा सकेगी।उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित निगरानी इस पूरे नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। यदि किसी हार्वेस्टिंग सिस्टम में उसकी अपेक्षित क्षमता के मुकाबले कम पानी पहुंचता है या रिचार्ज की क्षमता प्रभावित होती है, तो ऑनलाइन मॉनिटरिंग के माध्यम से इसकी जानकारी तुरंत मिल सकेगी और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि सभी सिस्टम मानसून के दौरान और उसके बाद भी प्रभावी ढंग से कार्य करते रहें।

पार्षदों और ग्रीवेंस कमेटी सदस्यों की भी होगी भागीदारी

मीणा ने बताया कि हार्वेस्टिंग सिस्टम की निगरानी में स्थानीय पार्षदों तथा ग्रीवेंस कमेटी के सदस्यों को भी सहयोग लिया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर इन संरचनाओं की निगरानी मजबूत होगी और इनके निर्माण, रखरखाव तथा कार्यप्रणाली से संबंधित समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।जीएमडीए चरणबद्ध तरीके से नए हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करेगा। स्थान चयन में तकनीकी उपयुक्तता, भूजल रिचार्ज की क्षमता, बारिश के पानी के बहाव की दिशा तथा मौजूदा स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क के साथ बेहतर एकीकरण को प्राथमिकता दी जाएगी।

इस पहल के माध्यम से जीएमडीए का लक्ष्य है कि बारिश का अधिक से अधिक पानी शहर में ही रोककर जमीन में रिचार्ज किया जाए। इससे गुरुग्राम की दीर्घकालिक जल निकासी प्रणाली मजबूत होने के साथ-साथ बारिश के पानी के बेहतर प्रबंधन और जलभराव की समस्या को कम करने में भी मदद मिलेगी।

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