अनिल विज की लोकप्रियता पर पूर्व भाजपा नेता का बड़ा दावा, बोले- ‘असल में मुख्यमंत्री तो विज होने चाहिए थे’
चंडीगढ़/गुरुग्राम, 5 अगस्त। हरियाणा के बिजली एवं परिवहन मंत्री अनिल विज को लेकर भाजपा के पूर्व नेता सुमेर तंवर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने अनिल विज को हरियाणा के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि प्रदेश की जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ है। तंवर ने यहां तक कहा कि अगर जनता के बीच लोकप्रियता और पकड़ को आधार बनाया जाए तो ‘असल में मुख्यमंत्री अनिल विज को होना चाहिए था।
सुमेर तंवर ने कहा कि हरियाणा के 90 विधायकों में अनिल विज की अपनी अलग पहचान है। उनका दावा है कि भाजपा का आम कार्यकर्ता हो या सामान्य नागरिक, वह अनिल विज से आसानी से मिलकर अपनी समस्या रख सकता है। उन्होंने कहा कि यही सीधा संवाद विज को दूसरे नेताओं से अलग करता है।
दिल्ली, यूपी और बिहार तक लोकप्रियता का दावा
सुमेर तंवर ने दावा किया कि अनिल विज की लोकप्रियता केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत दूसरे राज्यों में भी अनिल विज की राजनीतिक पहचान और लोकप्रियता है।
हालांकि, विभिन्न राज्यों में अनिल विज के सबसे अधिक लोकप्रिय नेता होने का दावा सुमेर तंवर का राजनीतिक आकलन है। इस दावे के समर्थन में किसी स्वतंत्र सर्वेक्षण या आंकड़े का उल्लेख नहीं किया गया है।
‘जो मंत्रालय मिला, वही दौड़ने लगा’
पूर्व भाजपा नेता ने अनिल विज की कार्यशैली की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार में उन्हें जब भी कोई मंत्रालय मिला, उन्होंने उस विभाग में सक्रियता के साथ काम किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में अनिल विज के पास बिजली और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग हैं और दोनों विभागों में उनकी सक्रियता दिखाई देती है। तंवर के मुताबिक, विज की कार्यशैली सिर्फ अधिकारियों से रिपोर्ट लेने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वे जमीनी स्तर पर विभागीय कामकाज की जानकारी लेने और समस्याओं के समाधान पर जोर देते हैं।
जनता दरबार बना था चर्चा का विषय
सुमेर तंवर ने अनिल विज के पुराने जनता दरबार का विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जनता दरबार में हरियाणा के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते थे।
तंवर ने दावा किया कि कई बार जनता की शिकायतें सुनने का सिलसिला रात के दो बजे तक चलता था। उनके मुताबिक, लोगों को सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्या रखने का अवसर मिलता था और अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाते थे।
उन्होंने कहा कि जनता दरबार की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी चर्चा हरियाणा के साथ-साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान तक होने लगी थी।
‘तत्कालीन मुख्यमंत्री भी घबरा गए थे’
सुमेर तंवर ने दावा किया कि अनिल विज के जनता दरबार में लगातार बढ़ती भीड़ और उनकी बढ़ती लोकप्रियता से उस समय के मुख्यमंत्री भी चिंतित हो गए थे। तंवर के अनुसार, बाद में जनता दरबार को बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि आज भी हरियाणा के लोग अनिल विज के उस जनता दरबार को याद करते हैं। उनके मुताबिक, जनता को वहां अपनी शिकायत सीधे मंत्री के सामने रखने और समाधान की उम्मीद रहती थी।
हालांकि, जनता दरबार को तत्कालीन मुख्यमंत्री के दबाव या चिंता के कारण बंद किए जाने का दावा सुमेर तंवर का है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
‘अधिकारी भी घबराते थे’
पूर्व भाजपा नेता ने दावा किया कि जनता दरबार में शिकायतें सीधे मंत्री तक पहुंचने के कारण संबंधित अधिकारियों पर भी जवाबदेही का दबाव रहता था। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को शिकायतों पर कार्रवाई करनी पड़ती थी और इसी वजह से लोगों के बीच जनता दरबार की विश्वसनीयता बनी।
तंवर ने कहा कि अनिल विज की पहचान ऐसे नेता के तौर पर बनी, जिनके सामने आम आदमी बिना किसी बड़े राजनीतिक संपर्क के अपनी बात रख सकता था।
कोविड काल में भी सक्रिय रहने का दावा
सुमेर तंवर ने कोरोना महामारी के दौरान अनिल विज की सक्रियता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब देश कोविड महामारी की चपेट में था और आम लोगों में डर का माहौल था, उस दौरान भी अनिल विज ने मंत्रालय में जाकर काम करना जारी रखा।
तंवर ने दावा किया कि बीमारी के बावजूद अनिल विज ऑक्सीजन सिलेंडर के सहारे मंत्रालय पहुंचते थे। वहां वे अधिकारियों के साथ बैठक करते और लोगों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश देते थे।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान जब बड़ी संख्या में लोग और नेता घरों से बाहर निकलने से बच रहे थे, उस समय अनिल विज लगातार मंत्रालय और जनता के बीच सक्रिय रहे।
‘बीमारी भी जनता की सेवा के आड़े नहीं आई’
सुमेर तंवर ने कहा कि अनिल विज ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को जनता की सेवा में बाधा नहीं बनने दिया। उनके अनुसार, विज की यह कार्यशैली उनके समर्थकों और जनता के बीच उनकी अलग छवि बनाती है।
उन्होंने दावा किया कि आज भी अनिल विज जनता की समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते हैं और अधिकारियों को शिकायतों के समाधान के लिए निर्देश देते हैं।
‘असल में मुख्यमंत्री अनिल विज होने चाहिए थे’
सुमेर तंवर ने अनिल विज की राजनीतिक भूमिका पर सबसे बड़ा बयान देते हुए कहा कि ‘असल में तो मुख्यमंत्री अनिल विज होने चाहिए थे।’
उन्होंने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करता है और पार्टी का निर्णय सर्वोपरि होता है।
तंवर ने कहा कि अनिल विज भाजपा के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। उन्होंने लंबे समय तक संगठन और सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं और लगातार चुनावी राजनीति में सक्रिय रहे हैं।
‘विज के आदेश अधिकारियों में नहीं रुकते’
सुमेर तंवर ने दावा किया कि अनिल विज की प्रशासनिक पकड़ मजबूत है और उनके निर्देशों को अधिकारी गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने कहा कि विज अधिकारियों से सीधे जवाब मांगने और काम में तेजी लाने के लिए जाने जाते हैं।
उनके मुताबिक, अनिल विज की कार्यशैली में स्पष्टता और सख्ती है, जिसके कारण विभागीय स्तर पर उनके निर्देशों पर कार्रवाई होती है।
भाजपा के पुराने नेताओं में गिने जाते हैं विज
अनिल विज हरियाणा भाजपा के वरिष्ठ और लंबे समय से सक्रिय नेताओं में शामिल हैं। वे कई बार विधायक रह चुके हैं और विभिन्न सरकारों में मंत्री के तौर पर महत्वपूर्ण विभाग संभाल चुके हैं।
उनकी स्पष्ट और बेबाक राजनीतिक शैली के कारण वे अक्सर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहते हैं। समर्थक उन्हें जनता से सीधे जुड़ने वाले नेता के रूप में देखते हैं, जबकि राजनीतिक विरोधी उनके बयानों और कार्यशैली को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया देते रहे हैं।
बयान के बाद फिर गरमाई सियासी चर्चा
सुमेर तंवर के बयान के बाद हरियाणा की राजनीति में अनिल विज की भूमिका और लोकप्रियता को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा उनके इस बयान की है कि ‘असल में मुख्यमंत्री अनिल विज होने चाहिए थे।’ हालांकि, यह सुमेर तंवर का व्यक्तिगत राजनीतिक आकलन है और इसे भाजपा के आधिकारिक रुख या पार्टी नेतृत्व के फैसले के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
फिलहाल यह बयान ऐसे समय आया है जब हरियाणा की राजनीति में सरकार के कामकाज, मंत्रियों की भूमिका और नेताओं की जनता के बीच पकड़ को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में अनिल विज को लेकर किया गया यह दावा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और हवा दे सकता है।
















