शोर वो मचा रहे जो मंदिर बनते देखना नहीं चाहते थे, राम मंदिर निर्माण के लिए हम जेल गए, लाठियां खाईं और चोट के कारण सिर का ऑपरेशन कराया” – ऊर्जा मंत्री अनिल विज
श्रीराम के चोरों का रावण जैसा हाल होगा… न छोड़ेंगे योगी, न छोड़ेंगे नरेंद्र मोदी” – मंत्री अनिल विज
राम मंदिर का विरोध करने वालों को न कोर्ट बख्शेगा, न भगवान राम: सनातन विरोधियों को अनिल विज की दो-टूक
अम्बाला, 27 जून – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर विपक्ष को मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा कि “राम मंदिर चढ़ावे को लेकर आज वो ही लोग शोर मचा रहे हैं जो नहीं चाहते थे कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बने”। उन्होंने कहा “दुख तो हमारे जैसे लोगों को है जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए जेल काटी, गिरफ्तार हुए और पुलिस की लाठियां खाई! जिस कारण मेरे सिर पर गंभीर चोट आई थी और सर में गांठे पड़ गई थी जिसका ऑपरेशन मैनें 3 साल पहले ही करवाया है!
आज पत्रकारों से बातचीत के दौरान ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि श्रीराम मंदिर चढ़ावे को लेकर आज वही लोग शोर मचा रहे हैं जो चाहते नहीं थे कि राम मंदिर बने। उन्होंने कहा इन लोगों को इतनी समझ नहीं है कि “राम मंदिर उत्तर प्रदेश में है और उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री है योगी और उत्तर प्रदेश है भारत में और भारत के प्रधानमंत्री हैं नरेंद्र मोदी, न छोड़े योगी और न छोड़े मोदी किसी को, और चोरी हुई है भगवान श्रीराम की, भगवान राम की पहले भी चोरी हुई थी जब सीता माता का हरण रावण करके ले गया था, इसके बाद रावण के घर में दिया जलाने वाला नहीं रहा था।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि इन्हें कोर्ट से भी सजा मिलेगी, कानून से भी सजा मिलेगी और भगवान श्री राम तो इनको बक्शने वाले हैं नहीं किसी भी हालत में। उन्होंने कहा कि यह जो लोग शोर मचा रहे हैं यह नहीं चाहते थे कि राम मंदिर बने, इनको दुख भी नहीं है और यह एक तरह से कटाक्ष कर रहे हैं सनातन का मजाक उड़ाना चाहते हैं। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भावुक होते हुए उन दिनों को भी याद किया जब राम मंदिर को लेकर उन्होंने पुलिस की लाठियाँ खाई थी! मंत्री अनिल विज ने कहा कि दुख तो हमारे जैसे लोगों को है जिन्होंने 19 दिन जेल काटी और गिरफ्तार हुए और पुलिस की लाठियां खाई, जिसके कारण उनके सिर में गंभीर चोट आई थी और सर में गांठे पड़ गई थी जिनका ऑपरेशन उन्होंने पीजीआई से 3 साल पहले ही करवाया है। इन्हें दुख नहीं है यह तो हमारी खिल्ली उड़ा रहे हैं।

















