15 मई।
देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है, जिसका केंद्र है भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और उद्योगपति गौतम अडाणी से जुड़ा मामला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि यह समझौता देशहित में नहीं, बल्कि उद्योगपति गौतम अडाणी को राहत दिलाने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री ने “ट्रेड डील नहीं, बल्कि अडाणी की रिहाई का सौदा” किया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिका की न्याय व्यवस्था अडाणी समूह के खिलाफ चल रहे एक मामले को सुलझाने या खत्म करने पर विचार कर रही है। इस मामले में आरोप लगाया गया था कि अडाणी समूह ने भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए कथित तौर पर रिश्वतखोरी की योजना बनाई और निवेशकों को गुमराह किया। हालांकि, अडाणी समूह ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है।
इस मुद्दे पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एकतरफा नजर आता है, जिसमें राष्ट्रीय हितों की बजाय बाहरी दबाव और निजी हितों को प्राथमिकता दी गई है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अडाणी समूह अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश करने की योजना बना सकता है, जिससे हजारों रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी निवेश प्रस्ताव का कानूनी मामलों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज कर दिया है। जहां कांग्रेस सरकार पर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बता सकती है और इसे राजनीतिक साजिश करार दे सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में व्यापार समझौते और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच कोई संबंध है, या फिर यह केवल राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है। फिलहाल इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है और आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना है।

















