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पश्चिम एशिया तनाव : तेल-गैस संकट से बढ़ सकती है महंगाई, उद्योगों पर बढ़ेगा दबाव गुरुग्राम समेत औद्योगिक शहरों में ऑटो, टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग प्रभावित होने की आशंका, गुरुग्राम की तीन तहसीलें दलालों के कब्जे में, वजीराबाद तहसीलदार निलंबन के बाद भी हालात नहीं सुधरे प्रतिवेदनों की गंभीरता से समीक्षा/जांच की जाएगी , कई खाताधारकों के बैंक खाते अस्थायी रूप से फ्रीज/राशि होल्ड भिवानी में पत्रकार वार्ता: दिग्विजय चौटाला ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से एसवाईएल और चंडीगढ़ मुद्दे पर स्टैंड स्पष्ट करने की मांग की भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मीडिया एवं एंटरटेनमेंट क्षेत्र के लिए देशव्यापी एआई स्किलिंग कार्यक्रम की शुरुआत 40 बालिकाओं को एच.पी.वी. वैक्सीन की खुराक देकर अभियान की शुरुआत

March 7, 2026 5:41 pm

पश्चिम एशिया तनाव : तेल-गैस संकट से बढ़ सकती है महंगाई, उद्योगों पर बढ़ेगा दबाव गुरुग्राम समेत औद्योगिक शहरों में ऑटो, टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग प्रभावित होने की आशंका,

पश्चिम एशिया तनाव : तेल-गैस संकट से बढ़ सकती है महंगाई, उद्योगों पर बढ़ेगा दबाव पेट्रोल-डीजल और एलपीजी महंगे होने से आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

पश्चिम एशिया तनाव : तेल-गैस संकट से बढ़ सकती है महंगाई, उद्योगों पर बढ़ेगा दबाव

पेट्रोल-डीजल और एलपीजी महंगे होने से आम लोगों की जेब पर पड़ेगा असर

गुरुग्राम समेत औद्योगिक शहरों में ऑटो, टेक्सटाइल और केमिकल उद्योग प्रभावित होने की आशंका

गुरुग्राम, 06 मार्च।
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। खासकर Iran और Israel के बीच बढ़ती तनातनी से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव और बढ़ता है तो भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ने, उद्योगों की लागत बढ़ने और आम लोगों के जीवन पर दबाव पड़ने की संभावना है।

प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन Deepak Maini ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है। ऐसे में यदि कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ेगा, जिससे परिवहन लागत बढ़ेगी और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। महंगाई बढ़ने का बोझ आखिरकार आम उपभोक्ताओं को ही उठाना पड़ेगा।

3.55 लाख करोड़ रुपये के व्यापार पर असर संभव

Deepak Maini ने बताया कि भारत का Iran, Iraq, Israel, Jordan, Lebanon, Syria और Yemen जैसे पश्चिम एशियाई देशों के साथ लगभग 3 लाख 55 हजार करोड़ रुपये का व्यापार है। यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो इस व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। इससे भारत के निर्यात और आयात दोनों प्रभावित हो सकते हैं, जिसका सीधा असर कई उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ेगा।

तेल के साथ गैस आपूर्ति पर भी असर

उन्होंने कहा कि केवल कच्चे तेल की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि एलपीजी और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है। देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में पीएनजी का उपयोग उत्पादन प्रक्रियाओं में किया जाता है। यदि गैस की आपूर्ति कम होती है या कीमतें बढ़ती हैं तो उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ जाएगी। इससे उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और कंपनियों को आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ सकता है।

घरेलू बजट पर बढ़ेगा दबाव

एलपीजी की कीमतों में संभावित वृद्धि का असर सीधे आम लोगों के घरों तक पहुंचेगा। गैस सिलेंडर महंगे होने और आपूर्ति में देरी होने की स्थिति में मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। साथ ही पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे सब्जियों, खाद्य पदार्थों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

औद्योगिक शहरों पर पड़ेगा असर

Gurugram जैसे बड़े औद्योगिक और कॉर्पोरेट केंद्रों पर भी इस संकट का प्रभाव पड़ सकता है। यहां ऑटोमोबाइल, आईटी, टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की बड़ी कंपनियां काम करती हैं। ईंधन और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से इन कंपनियों की संचालन लागत बढ़ेगी, जिससे उत्पादन, निवेश और रोजगार पर भी असर पड़ सकता है।

वैकल्पिक ऊर्जा पर जोर देने की जरूरत

Deepak Maini ने कहा कि ऐसे वैश्विक संकट के समय सरकार और उद्योग जगत को मिलकर ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को बढ़ावा देना चाहिए। साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत करने और ऊर्जा आयात के विविध स्रोत विकसित करने की दिशा में काम करना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के अंतरराष्ट्रीय संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम पड़े।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, जिसका असर भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में सरकार और उद्योग जगत दोनों को संभावित आर्थिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

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