21 फरवरी 2026
अमेरिका की राजनीति और वैश्विक व्यापार जगत में बड़ी हलचल मच गई है। डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने उनके द्वारा लगाए गए वैश्विक आयात शुल्क को अवैध करार दे दिया है।
न्यायालय ने छह–तीन के बहुमत से स्पष्ट किया कि आयात पर कर लगाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं, बल्कि अमेरिकी संसद के पास होता है। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ट्रंप ने वर्ष 1977 के आपातकालीन आर्थिक शक्तियां कानून का गलत उपयोग किया था।
इस मामले में भारतीय मूल के वरिष्ठ वकील नील कट्याल ने न्यायालय में दलील दी कि अमेरिकी संविधान के तहत कर लगाने का अधिकार केवल संसद को है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार द्वारा पहले ही वसूले गए लगभग 130 से 175 अरब डॉलर के शुल्क का क्या होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह राशि कंपनियों को लौटाई जा सकती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया लंबी होगी और कई कानूनी विवाद भी सामने आ सकते हैं।
इसी बीच कॉस्टको, रेव्लॉन और बंबल बी फूड्स जैसी बड़ी कंपनियां धनवापसी के लिए पहले ही अदालत का दरवाजा खटखटा चुकी हैं। न्यायालय के फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने पलटवार करते हुए वर्ष 1974 के व्यापार कानून के तहत सभी देशों से आने वाले सामान पर दस प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक शुल्क लगाने की घोषणा कर दी है, जो डेढ़ सौ दिनों तक लागू रहेगा। इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ा है। पहले भारत पर कुल शुल्क अठारह प्रतिशत तक तय होने की संभावना थी, लेकिन अब यह घटकर केवल दस प्रतिशत रह गया है।
भारतीय निर्यातकों के लिए इसे बड़ी राहत माना जा रहा है। भारतीय निर्यात संगठन महासंघ के महानिदेशक अजय सहाय का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
वहीं वैश्विक व्यापार अनुसंधान पहल के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का मानना है कि भारत को अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते की शर्तों की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि भारत के सभी निर्यात पर यह दस प्रतिशत शुल्क लागू नहीं होगा। करीब चालीस प्रतिशत उत्पाद पहले से ही छूट की श्रेणी में आते हैं। लेकिन इस्पात, एल्यूमिनियम और कुछ वाहन पुर्जों जैसे क्षेत्रों पर ऊंचे क्षेत्रीय शुल्क अब भी बने रहेंगे।
धनवापसी को लेकर आम उपभोक्ताओं को सीधे लाभ मिलने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि यह साबित करना लगभग असंभव होगा कि बढ़ी हुई कीमत किस विशेष शुल्क के कारण हुई।
फिलहाल स्थिति साफ है। एक ओर सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा तय कर दी है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने नया वैश्विक शुल्क लागू कर यह संकेत दे दिया है कि आयात शुल्क उनकी आर्थिक नीति का अहम हिस्सा बना रहेगा। भारत के लिए यह फैसला राहत भरा जरूर है, लेकिन बदलती अमेरिकी शुल्क नीति के कारण भारतीय निर्यातकों के सामने दुविधा अभी भी बनी हुई है।

















