हरियाणा की राजनीति में इन दिनों फरीदाबाद सबसे ज्यादा चर्चा में है। वजह है बीजेपी के दो बड़े नेताओं के बीच बढ़ती खींचतान। एक तरफ हैं केंद्रीय राज्य मंत्री और फरीदाबाद से सांसद कृष्ण पाल गुर्जर, तो दूसरी तरफ हैं हरियाणा सरकार में मंत्री विपुल गोयल।मामला तब शुरू हुआ जब एक बैठक के दौरान कृष्ण पाल गुर्जर ने फरीदाबाद नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई सड़कों की हालत खराब है, सफाई व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। उन्होंने नगर निगम में भ्रष्टाचार होने की आशंका भी जताई और जांच की मांग की।इसके बाद हरियाणा सरकार में मंत्री विपुल गोयल ने बड़ा कदम उठाया। उन्होंने विजिलेंस विभाग को पत्र लिखकर नगर निगम फरीदाबाद के पिछले 10 साल के कामों की जांच कराने की मांग कर दी। यानी अब सिर्फ एक-दो प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरे एक दशक के कामकाज को जांच के दायरे में लाने की बात हो रही है।

बताया जा रहा है कि जांच की मांग में सड़क निर्माण, सीवर लाइन, पार्कों का विकास, पौधारोपण, सफाई मशीनों की खरीद, टेंडर प्रक्रिया और करोड़ों रुपये के विकास कार्य शामिल हैं। अगर जांच आगे बढ़ती है तो कई पुराने फैसलों और परियोजनाओं की फाइलें दोबारा खुल सकती हैं।अब सवाल उठ रहा है कि आखिर बीजेपी के ही दो बड़े नेता अपनी ही सरकार और अपने ही नगर निगम पर इतने गंभीर सवाल क्यों उठा रहे हैं? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार या विकास कार्यों का मामला नहीं है, बल्कि फरीदाबाद में लंबे समय से चल रही राजनीतिक खींचतान भी इसके पीछे एक बड़ी वजह हो सकती है।
फरीदाबाद बीजेपी में वर्षों से अलग-अलग गुट सक्रिय रहे हैं। चुनाव हो, संगठन की नियुक्तियां हों या फिर स्थानीय राजनीति के बड़े फैसले, कई बार नेताओं के बीच मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। लेकिन इस बार मामला खुलकर जनता के सामने आ गया है।यही वजह है कि अब विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर निशाना साध रहा है। विपक्ष का कहना है कि जब बीजेपी के अपने नेता ही नगर निगम के कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, तो सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजिलेंस जांच वास्तव में शुरू होगी? अगर जांच शुरू होती है तो क्या कोई बड़ा खुलासा होगा? और क्या इस पूरे विवाद का असर आने वाले समय में फरीदाबाद की राजनीति पर पड़ेगा?अब पूरे हरियाणा की नजर इस मामले पर टिकी हुई है, क्योंकि यह सिर्फ नगर निगम की जांच का मामला नहीं बल्कि बीजेपी के अंदर की राजनीति और शक्ति प्रदर्शन की लड़ाई के रूप में भी देखा जा रहा है।


















