“रेवाड़ी में अवैध होर्डिंग्स का खतरा: अंधड़ में गिरे बोर्ड, बड़ा हादसा टला”

रेवाड़ी/हरियाणा, 8 जून।

शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध होर्डिंग्स का कारोबार लोगों की जान के लिए खतरा बनता जा रहा है। रविवार को आए तेज अंधड़ के दौरान दिल्ली रोड और गढ़ी बोलनी रोड पर लगे दो भारी-भरकम होर्डिंग्स अचानक सड़क पर गिर गए। गनीमत यह रही कि घटना के समय वहां से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। हाल के दिनों में क्षेत्र में तेज अंधड़ और नुकसान की घटनाएं भी सामने आई हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेवाड़ी से निकलने वाली लगभग सभी प्रमुख सड़कों की ग्रीन बेल्ट पर हजारों की संख्या में अवैध होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इनमें से अधिकांश होर्डिंग्स लोहे के बने हुए हैं और एक-एक बोर्ड का वजन करीब 200 से 250 किलो तक बताया जा रहा है। ऐसे भारी ढांचे तेज हवा, बारिश या अंधड़ के दौरान कभी भी गिर सकते हैं और राहगीरों तथा वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।

जानकारी के अनुसार, इन अवैध होर्डिंग्स से हर महीने मोटी कमाई की जाती है। सूत्रों का दावा है कि एक होर्डिंग का किराया 50 हजार रुपये से लेकर एक लाख रुपये प्रतिमाह तक वसूला जाता है। इसी वजह से शहर में अवैध विज्ञापन बोर्डों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर ग्रीन बेल्ट और सड़क किनारे सार्वजनिक स्थलों पर बड़े पैमाने पर बोर्ड लगाए गए हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। करीब एक वर्ष पहले भी दिल्ली रोड पर एक होर्डिंग गिरने से एक व्यक्ति की जान जा चुकी है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों ने न तो व्यापक सर्वे कराया और न ही अवैध होर्डिंग्स हटाने के लिए कोई प्रभावी अभियान चलाया। देश के अन्य हिस्सों में भी होर्डिंग गिरने की घटनाओं में लोगों की मौत और घायल होने के मामले सामने आ चुके हैं, जिससे ऐसे ढांचों की सुरक्षा पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर खड़ा हो रहा है। जब भी अवैध होर्डिंग्स का मुद्दा उठता है तो संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। नगर परिषद, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है, जिसका फायदा कथित तौर पर होर्डिंग माफिया उठा रहे हैं।

अब नागरिकों की मांग है कि शहर में लगे सभी होर्डिंग्स का तत्काल सर्वे कराया जाए, अवैध बोर्डों को हटाया जाए और उनकी अनुमति देने वाले या कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

बड़ा सवाल: क्या रेवाड़ी में अवैध होर्डिंग्स का यह पूरा खेल जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव है, या फिर प्रशासन वास्तव में इस खतरे से अनजान बना हुआ है?

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