होली के शुभ अवसर पर गुरु मंत्र जाप से मिलेगी कष्टों से मुक्ति: पंडित अमरचंद
2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण, 4 मार्च को रंगों की होली : कथावाचक पं . अमर चन्द भारद्वाज
गुरुग्राम ॥ श्रीमाता शीतला देवी श्राइन बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं आचार्य पुरोहित संघ के अध्यक्ष कथावाचक पंडित अमर चन्द भारद्वाज ने बताया कि 3 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा मंगलवार को चंद्र ग्रहण है, जिसका सूतक आदि ग्रहण विधान संपूर्ण भारत में मान्य होगा!
इसलिए होलिका दहन को लेकर भ्रम बना हुआ है कि होली का त्यौहार किस दिन मनाया जाए ? क्योंकि होलिका दहन 3 मार्च 2026 पूर्णिमा को होना चाहिए परंतु 3 मार्च को चंद्र ग्रहण है। इस स्थिति में धर्म सिंधु एवं निर्णय सिंधु आदि शास्त्रों के अनुसार (इदं चंद्रग्रहणसत्वे वेधमध्ये कार्यम ग्रस्तोदये परदिने प्रदोषे पूर्णिमासत्वे ग्रहणमध्य एव कार्यम अन्यथा पूर्वदिने), दूसरे दिन में ग्रस्तोदय हो और प्रदोष काल में पूर्णिमा न हो तो पूर्व दिन होलिका दहन पूजा करें! साढ़े तीन प्रहर से अधिक पूर्णिमा और प्रतिपदा वृद्धि गामी होते हुए भी धर्म सिंधु में दिए गए ग्रहण विचार के वचन अनुसार होलिका दहन 2 मार्च 2026 सोमवार को प्रदोष काल में करना शास्त्र सम्मत होगा ! इस दिन भद्रा सायं काल 5:56 से मध्य रात्रि के बाद तक 3 मार्च 2026 रात्रि शेष 5:29 तक रहेगी इसलिए शास्त्र अनुसार यदि भद्रा मध्य रात्रि निशीथकाल के बाद तक रहे तो भद्रा में ही प्रदोष काल के समय भद्रा का मुख छोड़कर होलिका दहन करें क्योंकि इस दिन भद्रा का मुख प्रदोष काल में नहीं रहेगा! पंडित अमरचंद भारद्वाज ने कहा कि होलिका दहन का समय सूर्यास्त से 2 घंटा 24 मिनट तक का समय शास्त्र अनुसार शुभ माना जाएगा । दिनांक 3 मार्च 2026 फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को दोपहर 03:20 से सायं 06:47 तक चंद्र ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण से संबंधित सूतक काल 3 मार्च 2026 को प्रातः 06:20 से प्रारंभ होगा ! ग्रहण का अन्त संपूर्ण भारत वर्ष में सायं 6 बजकर 47 मिनट पर होगा! चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटा 27 मिनट रहेगी! ग्रहण काल में ध्यान देने योग्य बातें -१. ग्रहण काल से पहले खाने पीने योग्य पदार्थों में तुलसी दल/ कुशा डाल दें! पंडित अमरचंद भारद्वाज ने कहा कि गर्भवती महिलाएं चाकू,छुरी, कैंची आदि धार दार एवं नुकीली वस्तुओं का उपयोग ना करें एवं ग्रहण काल में घर से बाहर ना निकलें! .देव प्रतिमा / भगवान की मूर्तियों को स्पर्श न करें। इस दिन जितना संभव हो सके गुरु मंत्र जाप एवं नाम कीर्तन आदि करें! ॐ सोमाय नमः,ॐ चंद्राय नमः,ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।* मंत्र आदि का जाप करें! विशेष – इस दिन देव स्थान मंदिर आदि के पट बंद रहेंगे ! अर्थात इस दिन देव दर्शन का लाभ नहीं मिल पाएगा ।
















