अमेरिका–ईरान बातचीत पर ट्रंप का बड़ा बयान, जेनेवा वार्ता से फिर जगी उम्मीद

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17 फरवरी 2026

Donald Trump ने कहा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका औरईरान के बीच जिनेवा में होने वाली बातचीत को वे पूरा समर्थन देते हैं और खुद भी इसमें अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े रहेंगे। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि इस बार दोनों देश किसी ठोस समझौते तक पहुंच सकते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान एक सख्त रुख रखने वाला देश है, लेकिन उन्हें भरोसा है कि इस बार वह ज्यादा व्यावहारिक रुख अपनाएगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि अगर अमेरिका की हालिया सैन्य कार्रवाई नहीं हुई होती, तो ईरान एक महीने के भीतर परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था।उनका कहना है कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को परमाणु शक्ति संपन्न देश नहीं बनने देगा। यह बातचीत मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर केंद्रित है। इससे पहले भी दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई है, लेकिन या तो समझौते टूट गए या फिर केवल अस्थायी समाधान ही निकल सके।

इसी दौरान ट्रंप ने अमेरिका के घरेलू मुद्दों पर भी बयान दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका में महंगाई काफी कम है और कई जगह पेट्रोल की कीमत दो डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे है। अपराध के मुद्दे पर ट्रंप का दावा है कि अमेरिका में हत्या के मामले 1900 के बाद सबसे कम स्तर पर हैं। सीमा सुरक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि हजारों अवैध प्रवासियों को देश से बाहर भेजा गया है।

राजनीतिक मुद्दों पर ट्रंप ने सरकारी फंडिंग विवाद के लिए डेमोक्रेट्स को जिम्मेदार ठहराया और वोटर आईडी के मुद्दे पर विपक्ष पर धोखाधड़ी को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर उन्होंने क्यूबा से बातचीत जारी रहने की बात कही। साथ ही शी जिनपिंग से बातचीत के बाद ताइवान को लेकर जल्द फैसला लेने के संकेत भी दिए।

अमेरिका–ईरान टकराव की जड़ 1979 की ईरानी इस्लामिक क्रांति से जुड़ी है। उसी साल ईरानी छात्रों ने अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था और 52 अमेरिकियों को 444 दिन तक बंधक बनाया गया था। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु विवाद 2000 के बाद तब गहराया, जब अमेरिका को शक हुआ कि ईरान गुप्त रूप से परमाणु हथियार बना रहा है। ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।

सबसे बड़ा तनाव 2020 में तब देखने को मिला, जब अमेरिका ने ईरान के शीर्ष जनरल कासिम सुलेमानी को ड्रोन हमले में मार गिराया। आज की स्थिति में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को तेजी से आगे बढ़ा रहा है और अमेरिका को डर है कि वह जल्द परमाणु हथियार बना सकता है। इसी वजह से अब एक बार फिर जेनेवा में होने वाली बातचीत को बेहद अहम माना जा रहा है।

HM News India
Author: HM News India

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