असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर: भूपेन बोरा का इस्तीफा और फिर वापसी, कांग्रेस में मची हलचल

SHARE:

असम,17 फरवरी 2026

16 फरवरी को असम की राजनीति में उस समय बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन कुमार बोराह  ने सुबह अपने पद से इस्तीफा दे दिया और कुछ ही घंटों के भीतर अपना फैसला बदलते हुए इस्तीफा वापस ले लिया। एक ही दिन में हुए इस राजनीतिक यू-टर्न ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। बोरा के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस के असम प्रभारी भंवर जितेंद्र सिंह ने साफ किया कि भूपेन बोरा ने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा था, लेकिन उसे स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस परिवार में कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं और बातचीत के जरिए सभी मुद्दों को सुलझा लिया गया है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी समेत शीर्ष नेतृत्व ने भूपेन बोरा से लंबी बातचीत की। इसके बाद ही बोरा ने अपने फैसले पर पुनर्विचार करते हुए इस्तीफा वापस लेने का निर्णय लिया। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने भी इसकी पुष्टि की और कहा कि बोरा का इस्तीफा आलाकमान ने स्वीकार नहीं किया है।

इस्तीफा वापस लेने के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेन बोरा ने अपने फैसले के पीछे की वजहों पर विस्तार से कुछ भी कहने से इनकार किया। हालांकि उन्होंने इशारों में यह जरूर बताया कि पार्टी की अंदरूनी निर्णय प्रक्रिया को लेकर उनकी नाराजगी रही है। खासतौर पर उन्होंने माजुली यात्रा से जुड़े फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पार्टी यह भी तय नहीं कर पा रही है कि किसे कहां भेजा जाए, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच असम के मुख्यमंत्रीहिमंता बिस्वा सरमा ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर भूपेन बोरा चाहें, तो भारतीय जनता पार्टी  के दरवाजे उनके लिए खुले हैं और पार्टी उन्हें किसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ाने में मदद कर सकती है। मुख्यमंत्री के इस बयान को कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि भूपेन बोरा वर्ष 2021 से 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  की असम इकाई के अध्यक्ष रह चुके हैं। पिछले वर्ष उनकी जगह गौरव गोगोई को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। बोरा दो बार असम विधानसभा के विधायक भी रह चुके हैं। एक ही दिन में इस्तीफा और फिर उसकी वापसी ने यह साफ कर दिया है कि असम कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को किस तरह संभालता है और संगठन को किस दिशा में आगे ले जाता है।

HM News India
Author: HM News India

सबसे ज्यादा पढ़ी गई

Horoscope

Weather

और पढ़ें

राज्य