उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने सामने ?

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नई दिल्ली में संसद भवन के भीतर वोटिंग जारी है।
कागज़ पर ये चुनाव सिर्फ उपराष्ट्रपति का है… लेकिन असल में ये चुनाव है संविधान का।

एक तरफ़ इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार,,,,,सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी।
रेड्डी साफ कहते हैं—”ये लड़ाई सत्ता की कुर्सी की नहीं… संविधान की रक्षा की है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दावा कर रहे हैं
“जीत हमारी होगी, विपक्ष एकजुट है, लोकतंत्र की जीत होगी।

शिवसेना (UBT) की प्रियंका चतुर्वेदी ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला
ये चुनाव NDA बनाम इंडिया नहीं है, ये चुनाव है… संविधान मानने वालों और सत्ता की अंधभक्ति करने वालों के बीच।

यानी विपक्ष इस चुनाव को संविधान की जंग बताने में जुटा है।

लेकिन अब सुनिए सत्ता पक्ष का पलटवार।
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल का दावा—
जीत NDA की होगी… प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर और विकसित हो रहा है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भी आगे बढ़ते हैं—
जीत पक्की है… और देश के अगले उपराष्ट्रपति होंगे सी.पी. राधाकृष्णन। विपक्ष तो बस अपनी हताशा निकाल रहा है।”

रालोद सांसद राजकुमार सांगवान भी वही राग अलापते हैं
जीत बड़े अंतर से होगी।

अब सवाल उठता है
क्या ये चुनाव संविधान का इम्तिहान है?
या फिर सत्ता की ताकत का प्रदर्शन?

एक तरफ़ विपक्ष का दावा,,,,संविधान और लोकतंत्र की रक्षा होगी।
दूसरी तरफ़ NDA का दावा,,,,मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर बनेगा।

यानी खेल सिर्फ उपराष्ट्रपति का नहीं है… खेल है विचारधारा का।
ये साबित हो चुका है कि भारत में अब कोई चुनाव सिर्फ सत्ता की कुर्सी तक सीमित नहीं रहा।
हर चुनाव संविधान और लोकतंत्र की जंग बन चुका है।

तो अब देखना ये है कि संसद का सबसे ऊँचा आसन किसे मिलेगा
एक जज, जो अदालत से राजनीति में आया है और संविधान की रक्षा की बात करता है…
या फिर NDA का चेहरा, जो मोदी की ताकत और विकास की गारंटी बताकर वोट मांग रहा है।

कुछ घंटों में नतीजे आ जाएंगे।
लेकिन आज का सबसे बड़ा सबक यही है
भारत की राजनीति में अब हर चुनाव सिर्फ राजनीति नहीं… बल्कि लोकतंत्र और संविधान की असली परीक्षा बन चुका है।

HM News India
Author: HM News India

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