निजीकरण हुआ तो महंगी हो सकती है बिजली: रविंद्र यादव

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गुरुग्राम, 22 अक्टूबर।  हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण के विरोध में बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की हड़ताल लगातार तेज होती जा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिजली कर्मचारी धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। वहीं, कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया जाता, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। गुरुग्राम में बिजली विभाग की विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों ने सरकार से निजीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। बिजली कर्मचारी यूनियनों के नेताओं ने कहा कि उनका मकसद बिजली आपूर्ति बाधित करना नहीं है, बल्कि सरकारी बिजली व्यवस्था को बचाना और आम जनता के हितों की रक्षा करना है। उन्होंने आशंका जताई कि बिजली वितरण व्यवस्था निजी हाथों में जाने से भविष्य में बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, जिसका सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ेगा। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से इस मामले में जल्द फैसला लेने की मांग भी उठाई।

जनता की सेवा करना हमारा मकसद: सुशील शर्मा

ऑल इंडिया पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के सचिव सुशील शर्मा ने कहा कि बिजली कर्मचारियों का मकसद बिजली बाधित करना नहीं है। कर्मचारी जनता की सेवा करने के लिए बिजली विभाग में आए हैं और आगे भी जनता की सेवा करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि बिजली कर्मचारियों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए। सुशील शर्मा के अनुसार, विभाग के कई बड़े अधिकारी भी कर्मचारियों के साथ हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह कर्मचारियों की समस्याओं को समझे और उनकी मांगों पर उचित निर्णय ले, ताकि हड़ताल को समाप्त करने का रास्ता निकल सके।

 

निजीकरण हुआ तो महंगी हो सकती है बिजली: रविंद्र यादव

हरियाणा प्रदेश इलेक्ट्रिकल बोर्ड के नेता रविंद्र यादव ने बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों का उद्देश्य सरकार को झुकाना नहीं है, लेकिन यदि बिजली निगम का निजीकरण किया गया तो कर्मचारी चुप नहीं बैठेंगे। रविंद्र यादव ने आशंका जताई कि निजीकरण के बाद बिजली की प्रति यूनिट कीमत बढ़ सकती है। इसका असर गरीब परिवारों पर पड़ेगा और उनके लिए बिजली का बिल चुकाना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज गरीब परिवारों के सामने पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियां हैं। ऐसे में बिजली महंगी होने से उनकी परेशानी और बढ़ सकती है।उन्होंने कहा कि पहले मिट्टी के तेल से दीया जलाने का विकल्प भी लोगों के पास होता था, लेकिन अब वह सुविधा भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसलिए सरकार को बिजली की उपलब्धता और उसकी कीमतों पर आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहिए।

बिजली मंत्री अनिल विज हमारे साथ, मुख्यमंत्री फैसला क्यों नहीं ले रहे: सुरेश रुहिल

हरियाणा पावर इंजीनियरिंग एसोसिएशन के सुरेश रुहिल ने बिजली मंत्री अनिल विज को लेकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिजली मंत्री भी कर्मचारियों की बात समझते हैं, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आ रहा कि इस मामले में फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है। रुहिल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से सवाल करते हुए कहा कि प्रदेश के लाखों बिजली कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर सरकार जल्द निर्णय क्यों नहीं ले रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाई है और अब उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि बिजली कर्मचारियों की मांगों और निजीकरण से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट रुख अपनाया जाए, ताकि मौजूदा गतिरोध का समाधान निकल सके।

गुरुग्राम और नूंह में निजीकरण को लेकर उठाए सवाल

अनुबंध विद्युत संगठन के प्रदेश सचिव उदय शंकर ने कहा कि यदि सरकार ने कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और अधिक समय तक जारी रखा जा सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण व्यवस्था को निजी हाथों में क्यों देना चाहती है। उदय शंकर ने कहा कि बिजली विभाग में बड़ी संख्या में कर्मचारी काम कर रहे हैं और निजीकरण की आशंका के कारण उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। कर्मचारियों को डर है कि इस फैसले से रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें अपने परिवारों के पालन-पोषण में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

बेरोजगारी बढ़ने की आशंका, गिरफ्तारी देने को भी तैयार कर्मचारी

बिजली कर्मचारी यूनियनों के सभी नेताओं ने एक स्वर में निजीकरण का विरोध करते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों की नौकरी और भविष्य पर असर पड़ने की आशंका है। उनका कहना है कि यदि सरकारी बिजली निगमों की भूमिका कम होती है तो कर्मचारियों के सामने रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।  यूनियन नेताओं ने कहा कि कर्मचारी लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन वे कानून को अपने हाथ में नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार या प्रशासन आंदोलन के दौरान यूनियन पदाधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार करना चाहता है तो वे इसके लिए भी तैयार हैं। उनके मुताबिक, आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।

जोखिम भरे काम को देखते हुए कर्मचारियों ने सरकार से की अपील

बिजली कर्मचारियों ने अपने काम की प्रकृति का उल्लेख करते हुए कहा कि वे दिन-रात लोगों की बिजली संबंधी समस्याओं को दूर करने में जुटे रहते हैं। बिजली की लाइन में खराबी आने या आपूर्ति बाधित होने पर कर्मचारियों को कई बार जोखिम उठाकर काम करना पड़ता है। करंट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। नियन नेताओं ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों की सुरक्षा, सेवा शर्तों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार तक जमीनी स्थिति की सही जानकारी नहीं पहुंचा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार को विभाग के भीतर की वास्तविक परिस्थितियों को समझकर निर्णय लेना चाहिए।

हड़ताल समाप्त कराने के लिए सरकार के सामने चुनौती

हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के बीच सरकार के सामने बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और कर्मचारियों के साथ बातचीत के जरिए समाधान निकालने की चुनौती है। कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में अपना आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है, जबकि आम उपभोक्ताओं की चिंता बिजली सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर बनी हुई है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत से सहमति बनती है तो हड़ताल समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है। वहीं, मांगों पर फैसला नहीं होने की स्थिति में आंदोलन और लंबा खिंचने की आशंका है।

HM News India
Author: HM News India

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