भिवानी , 27 जुलाई
भिवानी। शहर के जाने-माने कत्थक गुरु दम्पति विपिन शर्मा और तान्या शर्मा द्वारा संचालित भारतीय संस्कृति और गुरु शिष्य परम्परा को समर्पित गुरु वंदन कला केंद्र का प्रथम वार्षिक महोत्सव आज रविवार को सांस्कृतिक सदन में सम्पन्न हुआ।आज के समय में जहां फूहड़ता भरे गानों के साथ रील बना रहे हैं वहीं कला केंद्र में बच्चों ने शास्त्रीय और उप शास्त्रीय नृत्य सीख कर इस महोत्सव की शोभा बढ़ा दी।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाक्टर धर्मवीर ढिल्लों, विशिष्ट अतिथि डाक्टर वीके चुघ रहे। कार्यक्रम में विशेष रूप से जयपुर घराना से जय कुमार जावड़ा ( कत्थक गुरु), सांवर मल (हारमोनियम), परमेश्वर लाल (तबला) और दयाम अली (सारंगी) ने कार्यक्रम को एक सूत्र में बांधे रखा। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वन्दना से की गई जिसमें कला केंद्र के छोटे बच्चों ने मन मोहने वाली प्रस्तुति दी गई। पश्चात चार कत्थक नृत्य की प्रस्तुतियां बच्चों ने दी और दर्शकों को बार बार तालियां बजाने को बाध्य किया। एक प्रस्तुति उप शास्त्रीय नृत्य की भी बच्चों द्वारा दी गई। जयपुर घराना से जय कुमार जावड़ा ने कत्थक के थोड़े, टुकड़े आदि से शुरुआत करके अंत में मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो प्रस्तुत करके दिखा दिया कि गुरु क्या होते हैं। जयपुर घराना से ही सांवर मल कत्थक’ने अपनी गायन प्रस्तुति केसरिया बालम से सभी का मन मोह लिया। अंतिम प्रस्तुति दृष्टिका बच्ची की रही। इस कार्यक्रम में 6 साल की बच्ची से लेकर 50 साल की महिला ने अपना-अपना हुनर दिखाया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डाक्टर धर्मवीर ढिल्लों ने अपने उद्बोधन में कहा कि भिवानी में मैंने ऐसा कार्यक्रम आज तक नहीं देखा जिसमें बच्चे शास्त्रीय नृत्य कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि डाक्टर शिवकांत शर्मा ने कहा कि भिवानी जैसे छोटे शहर में शास्त्रीय नृत्य का कार्यक्रम करना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। विपिन और तान्या ने बच्चों को नृत्य में पारंगत करना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। डाक्टर शिवकांत ने आए हुए सभी लोगों से आग्रह किया कि अपने बच्चों को ऐसे ही गुरु की संगत में रखें और इन दोनों पति-पत्नी का हौंसला बढ़ाएं।कार्यक्रम को सभी अतिथिगण सारी प्रस्तुतियां देख कर मंत्रमुग्ध रह गये और बार बार तालियां बजाकर अपनी खुशी जाहिर कर रहे थे। विपिन और तान्या के गुरु और जयपुर घराना के जय कुमार जावड़ा को आश्चर्य हुआ कि दक्षिण हरियाणा के भिवानी शहर में भी में शास्त्रीय नृत्य जैसी विधा में भी बच्चे अपना भविष्य बनाने में रुचि ले रहे हैं। भिवानी जैसे छोटे शहर में इस अनूठे कार्यक्रम का होना यह साबित करता है कि पाश्चात्य नृत्य शैलियों को छोड़ कर बच्चों में शास्त्रीय नृत्य के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है। वह दिन दूर नहीं जब यहां शास्त्रीय नृत्य संगीत की धूम होगी।
















