दिल्ली /पटना 31 अगस्त / बिहार की सियासत में आरक्षण के मुद्दे ने अब ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है… जिसकी गूंज सीधे एनडीए के अंदर तक पहुंच गई है…
एक तरफ केंद्रीय मंत्री और एलजेपी रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान हैं… तो दूसरी तरफ हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनके बेटे बिहार सरकार के मंत्री संतोष कुमार सुमन…
मुद्दा है अनुसूचित जाति-जनजाति आरक्षण में उप-वर्गीकरण यानी कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर का… लेकिन इस मुद्दे पर अब एनडीए के दो सहयोगी दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं…
और मामला सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रुका… बात पहुंच गई है इस्तीफे की मांग तक…
दरअसल केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने आरक्षण में क्रीमी लेयर और सब-कोटा की बात करने को लेकर जीतन राम मांझी और संतोष सुमन पर निशाना साधा… चिराग ने दोनों से मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग कर दी…
चिराग का कहना है कि अगर कोई नेता एससी-एसटी आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की बात करता है… तो उसे अपने मंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए…
लेकिन चिराग के इस वार के बाद जीतन राम मांझी और संतोष सुमन ने भी पलटवार करने में देर नहीं लगाई…

जीतन राम मांझी ने साफ कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण खत्म करने की बात नहीं कर रही है… बल्कि उनका जोर इस बात पर है कि आरक्षण का लाभ समाज के उन गरीब और पिछड़े तबकों तक भी पहुंचे… जो आज भी इससे वंचित हैं…
मांझी ने चिराग पासवान को ही चुनौती दे डाली…
उन्होंने कहा कि अगर चिराग पासवान उनका और उनके बेटे का इस्तीफा मांग रहे हैं… तो पहले उन्हें खुद इस्तीफा देना चाहिए…
यानी एनडीए के भीतर आरक्षण का मुद्दा अब सीधे मंत्री पद और राजनीतिक अस्तित्व की बहस में बदलता दिखाई दे रहा है…
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जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में मंत्री संतोष कुमार सुमन ने तो चिराग पासवान को जवाब देते हुए यहां तक कह दिया कि…
“हम इस्तीफा देने को तैयार हैं… लेकिन चिराग पासवान भी इस्तीफा दें।”
संतोष सुमन ने तंज कसते हुए कहा कि चिराग की पार्टी के पास उनसे ज्यादा संख्याबल है… राजनीतिक रूप से वह तीसरी पीढ़ी में आते हैं… लिहाजा इस्तीफे की शुरुआत भी उन्हीं से होनी चाहिए…
यानी संदेश बिल्कुल साफ है…
इस्तीफा चाहिए तो पहले आप दीजिए… उसके बाद हम भी देने को तैयार हैं।
लेकिन इस पूरे विवाद में संतोष सुमन ने एक अहम सफाई भी दी…
उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बयान या सोशल मीडिया पोस्ट में कहीं भी क्रीमी लेयर लागू कर एससी-एसटी समाज के लोगों को आरक्षण से बाहर करने की बात नहीं कही है।
उनका कहना है कि कोटे में कोटा और क्रीमी लेयर दो अलग-अलग मुद्दे हैं…
संतोष सुमन ने कहा कि दोनों को एक साथ जोड़कर जनता को भ्रमित नहीं किया जाना चाहिए…
उनके मुताबिक उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि एससी वर्ग के भीतर जो जातियां आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से बेहद पिछड़ी हुई हैं… उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाए।
संतोष सुमन ने मुसहर, भुइयां, हलखोर, नट और डोम जैसे समुदायों का जिक्र करते हुए कहा कि इन वर्गों के लोग आज भी कई स्तरों पर पिछड़े हुए हैं…
उनका दावा है कि दलित समाज के भीतर भी कुछ समुदायों को भेदभाव और छुआछूत का सामना करना पड़ता है…
और इसी वजह से वह आरक्षण खत्म करने के नहीं… बल्कि आरक्षण के लाभ को ज्यादा जरूरतमंद तबके तक पहुंचाने के पक्ष में हैं।
संतोष सुमन ने चिराग पासवान पर निशाना साधते हुए कहा कि एससी-एसटी समाज के मुद्दे पर सामंती सोच के साथ बात नहीं होनी चाहिए… नेताओं को सिर्फ राजनीतिक मंच से बयान देने के बजाय गरीबों की बस्तियों और झोपड़ियों में जाकर उनकी वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।

वहीं इस विवाद के बीच मोतिहारी में हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के गरीब चौपाल सम्मेलन में भी आरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठा…केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि वह हमेशा गरीबों के हक की लड़ाई लड़ते रहे हैं…
मांझी का कहना है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो सबसे ज्यादा जरूरतमंद हैं…उनका दावा है कि आरक्षण में बदलाव की मांग का विरोध मुख्य रूप से वही लोग कर रहे हैं जो पहले से संपन्न हो चुके हैं…
लेकिन सवाल अब सिर्फ आरक्षण की नीति का नहीं रह गया है…सवाल ये है कि क्या आरक्षण के मुद्दे पर एनडीए के दो बड़े सहयोगी दलों के बीच बढ़ती दूरी बिहार की राजनीति में नया समीकरण तैयार करेगी?
एक तरफ चिराग पासवान… जो मांझी और संतोष सुमन से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं…तो दूसरी तरफ मांझी और संतोष सुमन… जो पलटवार करते हुए कह रहे हैं कि इस्तीफा चाहिए तो चिराग पहले खुद इस्तीफा दें।
यानी आरक्षण के सवाल पर शुरू हुई बहस अब पहुंच चुकी है सीधे इस्तीफे की राजनीति तक…और सबसे बड़ा सवाल यही है…क्या ये सिर्फ बयानबाजी है… या बिहार एनडीए के भीतर आने वाले दिनों में आरक्षण का मुद्दा बड़ा राजनीतिक टकराव खड़ा करने वाला है?








