नई दिल्ली/गुरुग्राम, 22 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली विभाग को निजी हाथों में सौंपने और ठेके पर देने के विरोध में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। कर्मचारी सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली संबंधी समस्याओं से परेशान लोग बिजली घरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें राहत मिलने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।बिजली कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो हड़ताल की अवधि बढ़ाई जा सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। दूसरी ओर, हड़ताल के चलते आम लोगों की मुश्किलें बढ़ने से बिजली विभाग और सरकार के सामने सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
मुख्यमंत्री की अपील भी बेअसर
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बिजली कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की थी, लेकिन कर्मचारी हड़ताल जारी रखे हुए हैं। सरकार की ओर से हड़ताल से निपटने और बिजली सेवाओं को बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं, हड़ताल में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की भी संभावना है। कुछ कर्मचारियों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है, हालांकि इसके बावजूद आंदोलन पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा है।
बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से आम जनता परेशान
बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरों में रहने वाले लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की समस्या दूर कराने के लिए लोग बिजली घरों तक पहुंच रहे हैं। लोगों की परेशानी इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा है। बिजली पर निर्भर घरेलू कामकाज, कारोबार और अन्य गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका के बीच उपभोक्ता जल्द समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। ऐसे में बिजली विभाग के सामने हड़ताल के दौरान शिकायतों का निपटारा करने और आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी है।
अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
हड़ताल के बीच बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी कामकाज से दूर हैं, जिसके कारण लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। वहीं, सरकार की ओर से विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को बिजली घरों पर तैनात किए जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ अधिकारियों को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में भी जिम्मेदारी दी गई है, ताकि बिजली सेवाओं को सुचारु बनाए रखने और स्थिति पर निगरानी रखने में मदद मिल सके।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
बिजली कर्मचारी निजीकरण और विभागीय व्यवस्था में बदलाव के विरोध में लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया तो हड़ताल को आगे बढ़ाया जा सकता है। अब देखना होगा कि हरियाणा सरकार और बिजली कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल, हड़ताल के बीच आम जनता की सबसे बड़ी चिंता बिजली आपूर्ति बहाल होने और शिकायतों का जल्द समाधान होने को लेकर है।






