August 24, 2026 10:59 am

यूपी में सपा-कांग्रेस नेताओं की भिड़ंत, गठबंधन में बढ़ती तकरार के संकेत

उत्तर प्रदेश,19 अगस्त 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान अब सार्वजनिक तौर पर भी दिखाई देने लगी है। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को सहारनपुर में एक बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक, बैठक के दौरान बोलने को लेकर दोनों नेताओं के बीच विवाद शुरू हुआ।

इमरान मसूद ने बैठक की मर्यादा और अनुशासन का हवाला देते हुए आपत्ति जताई और कहा कि बोलने के लिए चेयर की अनुमति ली जानी चाहिए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच माहौल गर्म हो गया और तीखी नोकझोंक की स्थिति बन गई। हालांकि, मामला मारपीट तक पहुंचने से पहले ही संभाल लिया गया।

इस घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही सियासी खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। खास बात यह है कि दोनों दल राष्ट्रीय और कई मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ खड़े नजर आते हैं। संसद में भी कांग्रेस और सपा के नेता कई मुद्दों पर संयुक्त रूप से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते दिखाई देते हैं। हाल ही में प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया था।

लेकिन उत्तर प्रदेश में जमीनी राजनीति की तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है।

आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों पार्टियां अपने-अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी हैं। सीटों के बंटवारे, नेतृत्व और उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन में किस दल की कितनी भूमिका होगी, जैसे सवालों को लेकर दोनों दलों के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं। हाल के दिनों में कांग्रेस और सपा के बीच सार्वजनिक बयानबाजी ने भी इन चर्चाओं को तेज किया है।

सियासी तौर पर देखा जाए तो कांग्रेस और सपा के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता बनाए रखनी है, वहीं दूसरी तरफ 2027 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपने-अपने संगठन और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार भी करना है। यही वजह है कि दोनों दलों के नेताओं के बीच स्थानीय स्तर पर वर्चस्व और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

सहारनपुर की घटना इसी व्यापक राजनीतिक तनाव की एक मिसाल के तौर पर देखी जा रही है।

हालांकि, एक बैठक में हुई तीखी बहस को सीधे तौर पर गठबंधन टूटने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस और सपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से विपक्षी एकता बनाए रखने के संकेत लगातार दिए जाते रहे हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों दल स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे मतभेदों को नियंत्रित कर पाएंगे? क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आएगा, सीटों और संगठनात्मक वर्चस्व को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है। ऐसे में सहारनपुर जैसी घटनाएं अगर अलग-अलग जिलों में दोहराई जाती हैं, तो इसका असर विपक्षी गठबंधन की चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल पर पड़ सकता है।

फिलहाल, सपा और कांग्रेस दोनों ही भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की बात कर रहे हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में नेताओं के बीच सामने आ रहे टकराव ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी मैदान में उतरने तक दोनों दल अपनी अंदरूनी खींचतान को खत्म कर पाएंगे, या 2027 का चुनाव गठबंधन के लिए नई चुनौती लेकर आएगा?

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