दक्षिण हरियाणा को हाईकोर्ट की सर्किट बेंच मिले: राज्यसभा में संजय भाटिया ने उठाई मांग
गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित करने का मुद्दा शून्यकाल में उठाया, न्याय तक आसान पहुंच और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
नई दिल्ली, 30 जुलाई। राज्यसभा में गुरुवार को शून्यकाल के दौरान सांसद संजय भाटिया ने दक्षिण हरियाणा के लोगों को न्यायिक सुविधाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से गुरुग्राम में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित किए जाने की मांग जोरदार तरीके से उठाई। उन्होंने कहा कि यह केवल एक न्यायिक व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि Access to Justice, Judicial Decentralization और Ease of Doing Business से जुड़ा राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा है।सदन में अपने वक्तव्य के दौरान सांसद ने कहा कि वर्तमान में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट केवल चंडीगढ़ में स्थित है। इसके कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह, पलवल, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ सहित दक्षिण हरियाणा के लाखों नागरिकों, अधिवक्ताओं, उद्योगों, एमएसएमई और कॉरपोरेट संस्थानों को प्रत्येक मामले के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है। इससे मुकदमों की लागत बढ़ती है, यात्रा में समय और संसाधनों की बर्बादी होती है तथा समय पर न्याय प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि गुरुग्राम आज देश का प्रमुख आईटी हब, कॉरपोरेट केंद्र, वित्तीय सेवाओं का बड़ा केंद्र, स्टार्टअप इकोसिस्टम और औद्योगिक विकास का प्रमुख इंजन बन चुका है। यहां बड़ी संख्या में वाणिज्यिक विवाद, श्रम कानून से जुड़े मामले, भूमि अधिग्रहण, मध्यस्थता (Arbitration), कर विवाद, दिवालियापन (Insolvency) और संवैधानिक मामलों से संबंधित याचिकाएं सामने आती हैं। ऐसे में गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच की स्थापना समय की आवश्यकता है।संजय भाटिया ने अपने संबोधन में यह भी बताया कि हाल ही में गुरुग्राम में अत्याधुनिक “टॉवर ऑफ जस्टिस” का उद्घाटन किया गया है। इस परिसर में आधुनिक न्यायिक अवसंरचना, डिजिटल कोर्टरूम और ई-कोर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो हाईकोर्ट की सर्किट बेंच के संचालन के लिए उपयुक्त आधार प्रदान करती हैं।
इसका लाभ केवल दक्षिण हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा -संजय भाटिया
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 39A का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य का दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को समान और सुलभ न्याय उपलब्ध कराया जाए। वहीं अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय (Speedy Justice) को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसलिए न्यायिक संस्थाओं का विकेंद्रीकरण केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।सांसद ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि हरियाणा सरकार, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और संबंधित विभागों के साथ मिलकर गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित करने की व्यवहार्यता (Feasibility Study) जल्द शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि इससे दक्षिण हरियाणा के लोगों को न्याय तक आसान, सुलभ और समयबद्ध पहुंच मिलेगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा तथा क्षेत्र में निवेश, उद्योग, कानून के शासन और Ease of Doing Business को नई मजबूती मिलेगी।
संजय भाटिया ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि गुरुग्राम में हाईकोर्ट की सर्किट बेंच स्थापित होती है तो इसका लाभ केवल दक्षिण हरियाणा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की न्यायिक व्यवस्था अधिक प्रभावी, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बन सकेगी।
















