August 16, 2026 3:48 am

भारत का सर्वोच्च न्यायालय का बड़ा आदेश: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए अतिरिक्त जजों की तैनाती, झारखंड-उड़ीसा से भी मदद

पश्चिम बंगाल, 24 फरवरी 2026

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद पर भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ा और अहम आदेश दिया है।

अदालत ने स्पष्ट कहा है कि चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखना सबसे जरूरी है। समय बहुत कम है और काम बेहद बड़ा है, इसलिए अधिक न्यायिक अधिकारियों की तैनाती आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश तैनात करने की अनुमति दी गई है।

अब कम से कम तीन वर्ष का अनुभव रखने वाले सिविल न्यायाधीश — चाहे वे वरिष्ठ श्रेणी के हों या कनिष्ठ श्रेणी के — विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में लगाए जा सकेंगे।

पहले से तैनात जिला एवं अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों के अलावा और न्यायिक अधिकारी भी नियुक्त किए जा सकेंगे। यदि फिर भी मानव संसाधन की कमी रहती है, तो झारखंड उच्च न्यायालय और उड़ीसा उच्च न्यायालय से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सहायता ली जा सकेगी। अदालत ने दोनों राज्यों के मुख्य न्यायाधीशों से ऐसे अनुरोधों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है। करीब 50 लाख मामलों में तार्किक विसंगतियां और अवर्गीकृत प्रविष्टियां पाई गई हैं।

सुनवाई के दौरान बताया गया कि अब तक 294 जिला और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अंतिम चरण में तैनात किए जा चुके हैं। यदि एक न्यायाधीश प्रतिदिन 250 मामलों का निपटारा करे, तब भी पूरी प्रक्रिया पूरी होने में लगभग 80 दिन लग सकते हैं।

जबकि अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जानी है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

✔ कम से कम तीन वर्ष अनुभव वाले सिविल न्यायाधीशों की तैनाती की जा सकेगी।
✔ आवश्यकता होने पर और न्यायिक अधिकारी नियुक्त किए जा सकेंगे।
✔ झारखंड और उड़ीसा से सेवारत एवं सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की मदद ली जा सकेगी।
✔ ये अधिकारी दावों और आपत्तियों की निगरानी तथा सत्यापन करेंगे।
✔ पूरी प्रक्रिया समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जाएगी।

अदालत ने भारत निर्वाचन आयोग को निर्देश देते हुए कहा है कि, अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी 2026 को ही प्रकाशित की जाएगी।

इसके बाद भी पूरक मतदाता सूची जारी की जा सकेगी और उसे अंतिम सूची का हिस्सा माना जाएगा।

सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेज

✔ आधार कार्ड
✔ कक्षा दस का प्रवेश पत्र
✔ कक्षा दस का उत्तीर्ण प्रमाण पत्र

 सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया है। अदालत ने यह भी कहा कि, राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच भरोसे की कमी के कारण प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हुई थी। इसी वजह से न्यायिक अधिकारियों की निगरानी में पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।

 सुनवाई करने वाली पीठ की अध्यक्षता सीजेआई सूर्यकांत ने की। पीठ ने कहा कि यदि केवल पश्चिम बंगाल के न्यायाधीशों के भरोसे काम छोड़ा गया, तो पूरी प्रक्रिया में लगभग 80 दिन लग सकते हैं।पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए बाहरी राज्यों के न्यायिक अधिकारियों की तैनाती आवश्यक और उचित कदम है। यह आदेश सीधे तौर पर पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को समय पर और निष्पक्ष तरीके से पूरा कराने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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