खंडहर कर दिए मगर गरीबों को नहीं दिए आशियाना स्कीम के 1088 फ्लैट: अभय जैन एडवोकेट

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Gurugram 3 october
-हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने गरीब नहीं मिलने का बनाया बहाना
-जिन लोगों को आवेदन किए थे, उनको भी 15 साल में नहीं दिए फ्लैट
-विभाग ने झुग्गियों में रहने वालों को फ्लैट देने की बात कहकर हाईकोर्ट को भी किया गुमराह
-विभाग के पंचकूला मुख्यालय से गुरुग्राम कार्यालय को पत्र भी भेजा गया, मगर फ्लैट नहीं दिए
-मानव आवाज की ओर से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव को भेजी गई शिकायत
गुरुग्राम। मानव आवाज संस्था के संयोजक अभय जैन एडवोकेट ने कहा कि वर्ष 2010 में आशियाना स्कीम के तहत सेक्टर-47 में नए बनाए गए 1080 फ्लैट हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से खंडहर कर दिए गए, मगर गरीबों को नहीं दिए। विभाग के अधिकारियों की या तो नेताओं के साथ मिलीभगत कारण ऐसा किया गया या फिर बिल्डर्स से मिलीभगत से।
अभय जैन एडवोकेट ने कहा कि जब हाईकोर्ट में झुग्गियों का मामला गया तो अधिकारियों ने सफेद झूठ बोलकर यह कह दिया गया कि गरीबों को फ्लैट दे दिए गए हैं, इसलिए सेक्टर-12ए से अवैध झुग्गियां हटायी जानी हैं। उन्होंने कहा कि जिन गरीबों ने आशियाना स्कीम में फ्लैट्स के लिए आवेदन किया था, अब वे ठगे से महसूस कर रहे हैं। उन्हें फ्लैट तो मिले ही नहीं, उनकी झुग्गियों पर बुल्डोजर चलाया जा रहा है। मानव आवाज संस्था के संयोजक ने कहा कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए डीटीपी आरएस बाठ बुधवार को भारी पुलिस बल लेकर अवैध कब्जे हटाने के लिए झुग्गियों को तोडऩे पहुंचे। यहां बनी कुल 109 झुग्गियों में से मात्र 20-25 झुग्गियां ही उन्हें तोडऩी थी। बाकी की 86 झुग्गियों को छोड़ दिया गया। क्योंकि उनका नाम आशियाना स्कीम के फ्लैट की सूची में है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस काम के लिए लाखों रुपये सरकारी अमले पर खर्च किया गया, वह तो काम पूरा हुआ ही नहीं। अभय जैन एडवोकेट ने कहा कि 20-25 झुग्गियां तोडऩे से पूरा अवैध कब्जा नहीं हटा।
उन्होंने कहा कि 13 नवंबर 2014 को जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की ओर से गुरुग्राम कार्यालय को निर्देश देकर कह दिया गया कि आशियाना स्कीम में आवेदन करने वाले झुग्गियों में रहने वालों को फ्लैट दे दिए जाएं तो फिर इस काम में कोताही क्यों बरती गई। कौन अधिकारी इस काम में अड़ंगा लगा रहे थे। किसकी मिलीभगत से 15 साल पहले नए बनाए गए फ्लैट्स आदेशों के 11 साल बाद भी गरीबों को ना देकर खंडकर कर दिए गए। जबकि हाईकोर्ट में दिए गए जवाब में विभाग की ओर से यह कहा गया कि गरीबों को फ्लैट दे दिए गए हैं। इस पर सरकार को सख्त एक्शन लेना चाहिए। अभय जैन एडवोकेट ने यह भी कहा कि विभाग के पास 2016 में 84 आवेदन ही सही पाए गए। फिर 2016 से लेकर 2025 तक विभाग ने बाकी के फ्लैट्स को आंवटित करने के लिए नए आवेदन क्यों नहीं मांगे। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद लोगों को झुग्गी तोडक़र सडक़ पर लाना है या उन्हें घर देना है।

HM News India
Author: HM News India

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