उत्तर भारत डूबा | हिसार में 3 युवकों की मौत | Flood Disaster 2025 | माँ… हमारा घर कब आएगा?

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आज के हालात देखकर ऐसा लगता है कि क्या प्रकृति हमसे रूठ गई है…
या फिर हम सरकार के घटिया सिस्टम का शिकार हो रहे हैं।

हरियाणा के हिसार से एक दिल दहला देने वाली खबर आई है 

तेज बारिश के बीच बिजली की तार की चपेट में आने से तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई।
इस हादसे पर हरियाणा के पावर मंत्री अनिल विज ने गहरा दुख जताया है और एक जेई को निलंबित कर दिया गया है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ़ निलंबन से इन जिंदगियों की भरपाई हो सकती है?

कासन हो अंबाला, पटना या जयपुर – फर्क नहीं पड़ता।
हर जगह वही सन्नाटा है, वही चीखें हैं, वही डर है।

एक छत पर खड़ा बच्चा माँ से पूछ रहा है –
“माँ, हमारा घर कब वापस आएगा?”
लेकिन माँ के पास कोई जवाब नहीं है…
क्योंकि घर तो पानी में बह चुका है।

पूरा उत्तर भारत इस वक्त बाढ़ की चपेट में है।
ऐसा लगता है जैसे नदियाँ कह रही हों –
“चले जाओ, मुझे अपना दायरा बढ़ाना है

पंजाब – 23 जिलों में गाँव के गाँव डूब गए, 1200 गाँवों की ज़िंदगी थम गई।
लोग आसमान की ओर हाथ जोड़कर इंद्रदेव से रहम की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन बारिश थमने का नाम ही नहीं ले रही।

हरियाणा का अंबाला – गलियों में 4 फीट तक पानी भर चुका है।
बच्चों की किलकारियाँ थम गई हैं। बुजुर्ग डंडे से पानी की गहराई नापते नज़र आ रहे हैं।
और उधर हथिनी कुंड बैराज से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है… मानो किसी ने मौत की नदी खोल दी हो।

दिल्ली – यमुना का रौद्र रूप देखकर लगता है कि नदी शहर की दुश्मन बन गई है।
207 मीटर पर बहती यमुना ने बाजारों को डुबो दिया – यमुना बाजार, तिब्बती बाजार, मोनेस्ट्री बाजार… सब खाली पड़े हैं।
10 हज़ार लोगों को अपने ही घरों से रेस्क्यू करना पड़ा।
और वो लोहे का पुल… जिस पर रोज़ हज़ारों कदम चलते थे… आज वीरान पड़ा है, क्योंकि वो भी डूब गया।

राजस्थान – जिसे कभी सूखे का प्रदेश कहा जाता था, आज पानी में डूबा पड़ा है।
जयपुर के करोड़ों के फ्लैट भी पानी में समा गए।
सबसे बड़े अस्पताल में मरीज़ स्ट्रेचर पर तैरते दिखाई दिए।
कोटा में रेल की पटरियाँ तक बह गईं।

उत्तर प्रदेश – आगरा में यमुना का पानी ताजमहल की बाउंड्री तक पहुँच गया।
वो ताजमहल, जो सदियों से इश्क़ की निशानी है, मानो आज कह रहा हो –
“प्यार तो बचा लिया, लेकिन इंसान अपनी ज़िंदगी क्यों नहीं बचा पा रहा?”
मथुरा में 900 परिवार अपना सबकुछ छोड़कर जा चुके हैं।
श्मशान घाट तक डूब गए – जहाँ आख़िरी विदाई दी जाती थी, वहाँ अब लाशें ढूँढी जा रही हैं।

हिमाचल – पहाड़ टूट रहे हैं।
सुंदरनगर में ज़मीन खिसककर घरों पर गिरी और पूरा परिवार पलभर में मिट गया।
कुल्लू की सड़कों पर ट्रक, बसें, कारें – सब मलबे में दब गईं।
लोग कहते हैं – “पहले नदी की गर्जना सुनी, फिर सिर्फ़ चीखें सुनाई दीं।”

मध्य प्रदेश – यहाँ आसमान ने हद से ज़्यादा बरसात कर दी है।
104% बारिश पहले ही हो चुकी है।
खेती के हरे-भरे खेत अब दलदल बन चुके हैं।
किसान सिर पकड़कर बैठे हैं – फसलें बह गईं, उम्मीदें बह गईं।


इस वक्त पूरा उत्तर भारत एक ही तस्वीर दिखा रहा है –
कहीं लोग नाव पर बैठकर बचावकर्मी का हाथ पकड़ रहे हैं,
तो कहीं बच्चा अपनी स्कूल ड्रेस देखकर रो रहा है –
“अब मैं पढ़ाई कैसे करूँगा?”

बारिश रुक जाएगी… पानी उतर जाएगा…
लेकिन इन बच्चों की आँखों का डर, इन औरतों के टूटे सपने,
और इन बुजुर्गों की डगमगाती उम्मीदें – शायद कभी वापस नहीं आएंगी।

क्योंकि यह सिर्फ़ बारिश नहीं है…
यह लोगों की यादों को बहाकर ले जाने वाला क़हर है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है –
क्या यह प्रकृति का बदला है?
या फिर हमारी सरकारों की नाकामी, जो इस आसमानी कहर से बचने का रास्ता तक नहीं निकाल पा रही?

HM News India
Author: HM News India

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