नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। हरियाणा की अनाज मंडियों में दूसरे राज्यों के किसानों की फसल की बिक्री को लेकर सख्ती किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि राज्य सरकार ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और दिल्ली सहित अन्य राज्यों के किसानों की फसल हरियाणा की मंडियों में नहीं खरीदी जाए। यदि दूसरे राज्यों के किसान अपनी फसल लेकर हरियाणा की मंडियों में पहुंचते हैं, तो उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। कुछ मामलों में ट्रैक्टर जब्त किए जाने की चेतावनी दिए जाने की भी बात कही जा रही है।हरियाणा की सीमा राजस्थान से लगती है और दोनों राज्यों के सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों के बीच लंबे समय से मंडियों में फसल बेचने का परस्पर चलन रहा है। पहले राजस्थान के कुछ किसान हरियाणा की मंडियों में अपनी फसल बेचते थे, जबकि हरियाणा के किसान भी राजस्थान की मंडियों में फसल लेकर जाते थे। लेकिन अब दूसरे राज्यों के किसानों की फसल की खरीद पर लगाई जा रही कथित पाबंदियों से किसानों की परेशानी बढ़ने की आशंका है।इस मामले में सरकार की ओर से जारी निर्देशों और ट्रैक्टर जब्त करने संबंधी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
हरियाणा के किसानों के लिए भी मंडी बदलना मुश्किल
दूसरे राज्यों के किसानों की फसल बिक्री पर सख्ती के साथ हरियाणा के भीतर भी मंडी व्यवस्था को लेकर किसानों की समस्याएं सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि अब वे अपने जिले से बाहर स्थित मंडियों में फसल बेचने को लेकर परेशान हैं। यदि किसी जिले की मंडी में उनकी फसल की खरीद की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो उनके सामने अपनी उपज बेचने का विकल्प सीमित हो जाता है।इसका असर उन किसानों पर विशेष रूप से पड़ सकता है, जिनकी फसल उनके नजदीकी खरीद केंद्र पर नहीं खरीदी जाती। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूसरी मंडियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और खरीद व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
पटौदी और हेली मंडी के किसानों की बढ़ी चिंता
गुरुग्राम जिले के पटौदी और हेली मंडी क्षेत्र में भी फसल खरीद को लेकर किसानों की परेशानी का मुद्दा उठ रहा है। इस क्षेत्र में धान, मूंगफली और दालों सहित विभिन्न फसलों की खेती की जाती है। किसानों की शिकायत है कि सभी स्थानीय मंडियों में हर प्रकार की फसल की खरीद की व्यवस्था उपलब्ध नहीं है।ऐसे में जिन किसानों की उपज संबंधित मंडी में नहीं खरीदी जा रही, उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूसरी मंडियों का रुख करना पड़ सकता है। यदि दूसरी मंडियों में फसल ले जाने पर भी प्रतिबंध या स्थानीय स्तर पर सीमाएं लागू हैं, तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए राजनीतिक प्रतिनिधियों और अधिकारियों के पास जाना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि मंडियों में फसल के अनुसार खरीद की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए भटकना न पड़े।
मुख्यमंत्री ने खरीद का भरोसा दिया, लेकिन दूसरे राज्यों के किसानों पर रोक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दिल्ली में किसानों को उनकी फसलों की खरीद का भरोसा दिलाया था। हालांकि, दूसरे राज्यों के किसानों की फसल हरियाणा की मंडियों में नहीं खरीदे जाने की बात भी सामने आई है।ऐसे में किसानों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि यदि किसी क्षेत्र की मंडी में उनकी फसल की खरीद नहीं हो रही है, तो वे अपनी उपज कहां बेचें। किसानों की मांग है कि खरीद प्रक्रिया को स्पष्ट बनाया जाए और पात्र किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए उचित मंडी उपलब्ध कराई जाए।
खरीद व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग
हरियाणा और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में फसल बिक्री के नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। किसानों के हित में यह भी आवश्यक है कि दूसरे राज्यों से आने वाले किसानों के लिए लागू नियमों, खरीद की पात्रता और प्रशासनिक कार्रवाई के प्रावधानों की जानकारी सार्वजनिक की जाए।








