जमुई कांड पर CM का बयान, फिर पीड़िता की तस्वीर पर विवाद
पटना 25 सितम्बर / बिहार के जमुई में नाबालिग लड़की के साथ हुई बदसलूकी का मामला अब सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इस मामले को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमा गई है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जमुई मामले पर कहा कि आरोपी सोशल मीडिया पर रील नहीं डालते तो शायद पुलिस उन्हें इतनी जल्दी पकड़ नहीं पाती। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि आज लोग वास्तविक जिंदगी से ज्यादा रील में जी रहे हैं और आरोपियों की रील ने ही पुलिस को उनकी पहचान तक पहुंचने में मदद की।जमुई मामले में पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मुख्य आरोपी नंदन यादव को पुलिस कार्रवाई के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने मामले की जांच के लिए SIT भी बनाई है।

इसी बीच मामला उस वक्त राजनीतिक विवाद में बदल गया, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पीड़िता और उसके परिवार की मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक तस्वीर बाद में हटा दी गई। इसके बाद RJD नेता तेजस्वी यादव और सांसद मीसा भारती ने आरोप लगाया कि तस्वीर से नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने POCSO कानून का हवाला देते हुए कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी तरफ, जमुई पुलिस खुद सोशल मीडिया पर पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले लोगों पर कार्रवाई कर रही है। पुलिस के मुताबिक करीब 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग से जुड़ा वीडियो या उसकी पहचान वाली कोई सामग्री शेयर न करें। अब इस मामले में दो सवाल एक साथ उठ रहे हैं—एक तरफ आरोपियों पर सख्त कार्रवाई, दूसरी तरफ पीड़िता की पहचान की सुरक्षा। मुख्यमंत्री की तस्वीर को लेकर विपक्ष के आरोपों पर आगे पुलिस या सरकार की ओर से क्या जवाब आता है, इस पर नजर बनी हुई है।








