गुरुग्राम, 13 जुलाई
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) ने शहर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को स्थायी रूप से कम करने के लिए ड्रेनेज नेटवर्क की अधूरी कड़ियों को जोड़ने का अभियान तेज़ कर दिया है। मेफील्ड गार्डन क्षेत्र के बाद अब सेक्टर-50 स्थित लोटस वैली स्कूल मार्ग पर भी ड्रेनेज नेटवर्क में गैप की पहचान की गई है। इस अधूरे हिस्से को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कर मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन से जोड़ा जा रहा है, जिससे वर्षा जल की तेज़ और निर्बाध निकासी सुनिश्चित हो सके।
GMDA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने बताया कि लोटस वैली स्कूल से सदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) की ओर जाने वाले लगभग 40 मीटर लंबे सतही नाले में ड्रेनेज कनेक्टिविटी का अभाव पाया गया है। इस अधूरे हिस्से का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यह नाला आगे गुरुग्राम विश्वविद्यालय के निकट स्थित मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन से जुड़ता है, जिससे बारिश का पानी बिना किसी रुकावट के शहर के मुख्य ड्रेनेज नेटवर्क तक पहुंच सकेगा।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त लोटस वैली स्कूल से गुरुग्राम विश्वविद्यालय की ओर दो अन्य स्थानों पर लगभग 20-20 मीटर लंबे सतही नालों के अधूरे हिस्सों को भी पूरा किया जाएगा। इन कार्यों के साथ पूरे मार्ग पर सतही नालों की सफाई, नई रोड गलियों (रोड गली) का निर्माण तथा ड्रेनेज नेटवर्क की व्यापक सफाई भी की जा रही है। इससे नालों की जल वहन क्षमता बढ़ेगी और वर्षा जल का प्रवाह अधिक सुचारु हो सकेगा।
सीईओ पी.सी. मीणा ने कहा कि GMDA की मानसून तैयारियों का प्रमुख उद्देश्य ड्रेनेज नेटवर्क को एक छोर से दूसरे छोर तक पूरी तरह जोड़ना है, ताकि कहीं भी पानी का प्रवाह बाधित न हो। उन्होंने कहा कि जिन स्थानों पर ड्रेनेज नेटवर्क अधूरा है या कनेक्टिविटी में कमी है, उनकी पहचान कर प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इससे बरसाती पानी सीधे मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेनों तक पहुंचेगा और शहर में जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने इंजीनियरिंग विंग को निर्देश दिए हैं कि शहरभर में ड्रेनेज नेटवर्क की सभी अधूरी कड़ियों का सर्वेक्षण कर उन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी सतही नालों की सफाई नियमित रूप से होती रहे, ताकि बारिश के दौरान जल निकासी व्यवस्था प्रभावी बनी रहे।
GMDA का मानना है कि ड्रेनेज नेटवर्क पूरी तरह जुड़ने से न केवल बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम होगी, बल्कि प्रमुख सड़कों पर यातायात भी बाधित नहीं होगा। इससे नागरिकों को मानसून के दौरान बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी और शहर की जल निकासी व्यवस्था अधिक मजबूत एवं टिकाऊ बनेगी।

















