August 17, 2026 7:41 am

अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, समयपूर्व रिहाई पर सुनवाई से इनकार

मुंबई,16 फरवरी 2026

1993 के मुंबई बम धमाकों के दोषी गैंगस्टर अबू सलेम को एक बार फिर बड़ा कानूनी झटका लगा है। भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने उसकी समयपूर्व रिहाई से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

सुनवाई के दौरान अबू सलेम की ओर से दलील दी गई कि भारत और पुर्तगाल के बीच हुए प्रत्यर्पण समझौते के अनुसार उसे 25 वर्ष से अधिक जेल में नहीं रखा जा सकता। वकील ने कहा कि सलेम निर्धारित अवधि से करीब 10 महीने अधिक सजा काट चुका है और उसकी आगे की हिरासत अवैध है।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अबू सलेम को टाडा जैसे गंभीर कानून के तहत दोषी ठहराया गया है और वह किसी सामाजिक या सार्वजनिक हित के लिए जेल में बंद नहीं है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी और अबू सलेम को अपनी बात बॉम्बे हाई कोर्ट में ही रखनी होगी।

अबू सलेम के वकील ऋषि मल्होत्रा ने अदालत को बताया कि सजा की गणना को लेकर जो भ्रम है, वह केवल एक छोटी-सी गणितीय त्रुटि है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि कम से कम हाई कोर्ट को इस मामले की जल्द सुनवाई का निर्देश दिया जाए, क्योंकि इस संबंध में तीन बार आवेदन किया जा चुका है।

हालांकि पीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और वकील से पूछा कि क्या नासिक जेल प्रशासन की रिपोर्ट पहले से हाई कोर्ट में दाखिल की जा चुकी है। जब वकील ने इसकी पुष्टि की, तो अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब सभी दस्तावेजों के आधार पर फैसला हाई कोर्ट ही करेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि वह इस स्तर पर अंतरिम जमानत की मांग पर विचार नहीं कर सकता। अदालत ने सलेम के वकील को निर्देश दिया कि यदि उन्हें जमानत चाहिए तो इसके लिए हाई कोर्ट में ही आवेदन किया जाए। पीठ ने दो टूक कहा कि टाडा के तहत सजा पाए अपराधी को किसी तरह की विशेष प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

गौरतलब है कि अबू सलेम को वर्ष 2002 में पुर्तगाल में फर्जी पासपोर्ट के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 11 नवंबर 2005 को उसे भारत लाया गया। प्रत्यर्पण के समय भारत ने यह आश्वासन दिया था कि सलेम को न तो मृत्युदंड दिया जाएगा और न ही 25 वर्ष से अधिक की जेल की सजा दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाके देश के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में गिने जाते हैं। 12 मार्च 1993 को मुंबई में अलग-अलग स्थानों पर एक के बाद एक कार बम विस्फोट हुए थे। इन हमलों में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और एयर इंडिया बिल्डिंग जैसे प्रमुख और व्यस्त इलाके भी निशाने पर थे।फिलहाल अबू सलेम की रिहाई से जुड़ा पूरा मामला अब बॉम्बे हाई कोर्ट की नियमित सुनवाई पर ही निर्भर करेगा और उसे अभी जेल में ही रहना होगा।

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