दिल्ली 26 सितम्बर/ देश में वोट चोरी के आरोप… चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल… और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष के आरोप… इन सबके बीच एक नाम फिर चर्चा में है… टीएन शेषन… एक ऐसा नाम, जिसकी चर्चा होते ही चुनाव आयोग की सख्ती और निष्पक्षता की तस्वीर सामने आ जाती है… कभी चुनावी नियमों को लेकर अपने फैसलों से सुर्खियों में रहने वाले शेषन आज फिर याद किए जा रहे हैं…वजह है देश में कथित वोट चोरी के आरोप… चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल… और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर जारी राजनीतिक बहस…आखिर कौन थे टीएन शेषन… और उन्होंने ऐसा क्या किया था कि करीब तीन दशक बाद भी उनकी कार्यशैली को उदाहरण के तौर पर याद किया जाता है?टीएन शेषन का पूरा नाम तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन था… 15 दिसंबर 1932 को केरल के पलक्कड़ जिले के तिरुनेल्लई में उनका जन्म हुआ… 1955 बैच के आईएएस अधिकारी शेषन ने प्रशासनिक सेवा में कई अहम ज़िम्मेदारियां निभाईं… और 12 दिसंबर 1990 को देश के दसवें मुख्य चुनाव आयुक्त बने…उनका कार्यकाल 11 दिसंबर 1996 तक रहा… लेकिन इन छह वर्षों में उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर ऐसी पहचान बनाई, जिसकी चर्चा आज भी होती है…

उस दौर में चुनावों के दौरान फर्जी मतदान… बूथ कैप्चरिंग… मतदाताओं को डराने-धमकाने और चुनावी खर्च में गड़बड़ियों जैसी चुनौतियां मौजूद थीं…टीएन शेषन ने चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों पर सख्ती बरतने पर जोर दिया…चुनाव आचार संहिता का पालन… उम्मीदवारों के चुनावी खर्च पर निगरानी… और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर रोक… उनकी कार्यशैली के प्रमुख हिस्से बने…मतदाता फोटो पहचान पत्र की व्यवस्था को आगे बढ़ाने में भी उनके कार्यकाल की अहम भूमिका रही… उनका जोर इस बात पर था कि चुनाव सिर्फ कराए न जाएं… बल्कि चुनावी प्रक्रिया में नियमों का पालन भी सुनिश्चित हो…टीएन शेषन की पहचान सिर्फ चुनावी नियमों पर सख्ती तक सीमित नहीं थी… वह चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर भी मुखर रहे…चुनाव आयोग के आधिकारिक कागजों पर लिखे जाने वाले सरकारी संदर्भ को लेकर उनकी आपत्ति का किस्सा भी अक्सर सुनाया जाता है… एक नेशनल अख़बार में छपी खबर के मुताबिक उनके कार्यकाल से पहले चुनाव आयोग के आधिकारिक कागजों और लिफाफों पर “इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया” लिखा जाता था। शेषन ने इस भाषा पर आपत्ति जताई और “गवर्नमेंट ऑफ इंडिया” हटवाने का निर्देश दिया। उनका तर्क था कि चुनाव आयोग सरकार के अधीन काम करने वाला मंत्रालय या विभाग नहीं है।हालांकि इस विशेष घटना की स्वतंत्र पुष्टि के लिए विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं…लेकिन चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर उनका रुख आधिकारिक

शेषन की कार्यशैली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली… 1996 में उन्हें चुनाव प्रक्रिया में सुधार और सरकारी सेवा में योगदान के लिए रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया…उनके काम को लेकर चुनाव आयोग ने भी उन्हें ऐसी शख्सियत बताया, जिन्होंने चुनावी प्रक्रिया की कार्यशैली और आयोग के पद की गरिमा को नई पहचान दी।








