दिल्ली 22 सितम्बर / देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके UPI को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। वजह है 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR की व्यवस्था। सरकार की तरफ से साफ किया गया है कि इस शुल्क का बोझ सीधे ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा। यानी आम ग्राहक के UPI भुगतान पर अलग से चार्ज लेने की अनुमति नहीं होगी।दिल्ली 22 सितम्बर /देश में UPI को लेकर बहस तेज।
लेकिन इसी बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार को UPI पर जीरो-फीस व्यवस्था जारी रखने की सलाह दी है। उनका कहना है कि UPI को सिर्फ एक भुगतान प्रणाली नहीं, बल्कि सार्वजनिक डिजिटल सुविधा के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लेनदेन पर शुल्क का असर कारोबारियों तक पहुंचता है तो कुछ छोटे व्यापारी नकद भुगतान को फिर से प्राथमिकता दे सकते हैं।
सरकार की दलील है कि UPI के पूरे सिस्टम को चलाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और ग्राहक सेवा पर खर्च होता है। नए MDR मॉडल का मकसद इसी इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना बताया गया है। वहीं सरकार ने यह भी तय किया है कि शुल्क को ग्राहक तक ट्रांसफर नहीं किया जा सकता।अब सवाल यही है कि UPI की लोकप्रियता और इसकी कम लागत वाली सुविधा को बरकरार रखते हुए सिस्टम का खर्च कैसे उठाया जाए। क्या MDR से डिजिटल पेमेंट का मॉडल मजबूत होगा या भविष्य में इसका असर कारोबारियों की लागत पर पड़ेगा? यही बहस अब तेज होती दिखाई दे रही है।








