कागजी रिपोर्ट नहीं, जमीन पर दिखेगा काम: गुरुग्राम में CM सैनी के कड़े तेवर

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कागजी रिपोर्ट नहीं, जमीन पर दिखेगा काम: गुरुग्राम में CM सैनी के कड़े तेवर

हरियाणा 3 अक्टूबर / हरियाणा3 के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का अब तक आपने सौम्य और मुस्कुराता हुआ अंदाज देखा होगा। लेकिन गुरुग्राम में हुई अधिकारियों की हाईलेवल बैठक में मुख्यमंत्री का तेवर बिल्कुल अलग नजर आया। यहां मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि अब काम सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।बैठक की शुरुआत में ही प्रदूषण विभाग के रीजनल ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि ड्यूटी में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से एक ऐसी समस्या को लेकर जवाब मांगा, जिसके समाधान की रिपोर्ट पहले ही उनकी टेबल तक पहुंच चुकी थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट में किए गए दावे और जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया, तो दोनों में बड़ा अंतर सामने आया।रिपोर्ट में समस्या के समाधान का दावा था, लेकिन मौके पर समस्या जस की तस बनी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के सामने प्रमाण के साथ स्थिति रखी और पूछा कि जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उसकी रिपोर्ट में समाधान कैसे दिखाया गया? इसके बाद अधिकारियों को रिपोर्ट और ग्राउंड रियलिटी के बीच का अंतर समझ में आया।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा और जनता की समस्याओं का समाधान सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर नजर आना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वह खुद नागरिकों से समस्याओं का फीडबैक लेते हैं। कई बार वह अपनी पहचान बताए बिना भी सीधे लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकारी व्यवस्था वास्तव में जमीन पर कैसी चल रही है।यानी सरकार की रिपोर्ट और जनता के अनुभव के बीच अंतर नहीं होना चाहिए।

बैठक में अधिकारियों को यह भी संकेत दिया गया कि गुरुग्राम में काम करने वाले अधिकारियों की ग्राउंड परफॉर्मेंस को उनकी ACR यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी दर्ज किया जाएगा।मतलब साफ है—अब सिर्फ कुर्सी पर बैठकर फाइल आगे बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को फील्ड में जाना होगा, जनता की समस्याओं को समझना होगा और समाधान का वास्तविक परिणाम भी सुनिश्चित करना होगा।

गुरुग्राम की वाटर सप्लई को मजबूत करने के लिए 69.585 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया है। इस परियोजना पर करीब 1,993.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे।इसके अलावा दिल्ली से गुरुग्राम में कूड़ा डालने वाले वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। RMC की जोनवार व्यवस्था और नागरिक शिकायतों की क्रॉस-चेकिंग को लेकर भी अधिकारियों को सख्ती से काम करने के निर्देश दिए गए।

गुरुग्राम की इस हाईलेवल बैठक से सरकार का संदेश साफ है—कागजी रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी है जमीन पर दिखाई देने वाला काम।

अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री के इन सख्त निर्देशों का असर आने वाले दिनों में गुरुग्राम की प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर कितना दिखाई देता है।हरियाणा 3 हरियाणाocto के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का अब तक आपने सौम्य और मुस्कुराता हुआ अंदाज देखा होगा। लेकिन गुरुग्राम में हुई अधिकारियों की हाईलेवल बैठक में मुख्यमंत्री का तेवर बिल्कुल अलग नजर आया। यहां मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि अब काम सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

बैठक की शुरुआत में ही प्रदूषण विभाग के रीजनल ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश देकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि ड्यूटी में लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से एक ऐसी समस्या को लेकर जवाब मांगा, जिसके समाधान की रिपोर्ट पहले ही उनकी टेबल तक पहुंच चुकी थी। लेकिन जब मुख्यमंत्री ने रिपोर्ट में किए गए दावे और जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया, तो दोनों में बड़ा अंतर सामने आया।

रिपोर्ट में समस्या के समाधान का दावा था, लेकिन मौके पर समस्या जस की तस बनी हुई थी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के सामने प्रमाण के साथ स्थिति रखी और पूछा कि जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उसकी रिपोर्ट में समाधान कैसे दिखाया गया? इसके बाद अधिकारियों को रिपोर्ट और ग्राउंड रियलिटी के बीच का अंतर समझ में आया।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने साफ कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा और जनता की समस्याओं का समाधान सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि जमीन पर नजर आना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि वह खुद नागरिकों से समस्याओं का फीडबैक लेते हैं। कई बार वह अपनी पहचान बताए बिना भी सीधे लोगों से बातचीत कर यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकारी व्यवस्था वास्तव में जमीन पर कैसी चल रही है।

यानी सरकार की रिपोर्ट और जनता के अनुभव के बीच अंतर नहीं होना चाहिए।

बैठक में अधिकारियों को यह भी संकेत दिया गया कि गुरुग्राम में काम करने वाले अधिकारियों की ग्राउंड परफॉर्मेंस को उनकी ACR यानी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट में भी दर्ज किया जाएगा।

मतलब साफ है—अब सिर्फ कुर्सी पर बैठकर फाइल आगे बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। अधिकारियों को फील्ड में जाना होगा, जनता की समस्याओं को समझना होगा और समाधान का वास्तविक परिणाम भी सुनिश्चित करना होगा।

गुरुग्राम की वाटर सप्लाई को मजबूत करने के लिए 69.585 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन परियोजना को भी आगे बढ़ाया गया है। इस परियोजना पर करीब 1,993.59 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

इसके अलावा दिल्ली से गुरुग्राम में कूड़ा डालने वाले वाहनों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। RMC की जोनवार व्यवस्था और नागरिक शिकायतों की क्रॉस-चेकिंग को लेकर भी अधिकारियों को सख्ती से काम करने के निर्देश दिए गए।

गुरुग्राम की इस हाईलेवल बैठक से सरकार का संदेश साफ है—कागजी रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी है जमीन पर दिखाई देने वाला काम।

अब देखने वाली बात होगी कि मुख्यमंत्री के इन सख्त निर्देशों का असर आने वाले दिनों में गुरुग्राम की प्रशासनिक व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं पर कितना दिखाई देता है।

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Author: hmnews india

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