बिहार 18 सितंबर / केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA शासित सभी 21 राज्यों में Uniform Civil Code यानी UCC लागू करने का लक्ष्य सामने रखा है। मुंबई में दिए बयान में शाह ने कहा कि कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है और उन्हें भरोसा है कि 2029 से पहले NDA के 21 राज्यों में इसे लागू किया जाएगा। लेकिन अमित शाह के इस बयान के बाद सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की हो रही है।वजह है BJP का अपना सहयोगी दल जेडीयू।

बिहार में NDA की सरकार है, लेकिन UCC को लेकर JDU) की लाइन BJP से अलग दिखाई दे रही है। JDU) नेता श्याम रजक ने कहा कि बिहार में UCC लागू नहीं होने दिया जाएगा और पार्टी अपने पहले के रुख पर कायम है। वहीं JD(U) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि वह अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। यानी अब कहानी सिर्फ BJP बनाम विपक्ष की नहीं रह गई है…कहानी NDA के अंदर की भी हो गई है। अमित शाह का लक्ष्य साफ है 2029 से पहले 21 NDA शासित राज्यों में UCC का विस्तार। लेकिन बिहार में सवाल यह है कि अगर सहयोगी दल ही इसके implementation पर अलग राय रखता है, तो इस लक्ष्य को जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा? और यहां एक और दिलचस्प बात है।JDU का रुख पूरी तरह UCC के खिलाफ बताना भी सही तस्वीर नहीं होगी। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने संसद में UCC के विचार का समर्थन किया था, लेकिन बिहार में इसे लागू करने को लेकर अलग रुख रखा है। पार्टी अब ड्राफ्ट और उसके प्रावधानों को देखने तथा BJP नेतृत्व से बातचीत की बात कर रही है।यानी सवाल UCC के समर्थन या विरोध से आगे बढ़कर उसके implementation का है।

बिहार में BJP और JDU) की राजनीति लंबे समय से साथ चल रही है। ऐसे में UCC जैसा मुद्दा दोनों दलों के बीच coordination की परीक्षा भी बन सकता है। खासकर तब, जब केंद्र की तरफ से 2029 की समयसीमा सामने रखी जा चुकी है।और सिर्फ JDU) ही नहीं…NDA के दूसरे सहयोगियों ने भी UCC पर पूरी तरह एक जैसी लाइन नहीं अपनाई है। LJP (रामविलास) के नेता चिराग पासवान ने UCC का ड्राफ्ट सार्वजनिक करने और सभी stakeholders के साथ व्यापक चर्चा की मांग की है। TDP ने भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर सभी संबंधित पक्षों को शामिल किया जाना चाहिए। दूसरी तरफ कुछ NDA सहयोगियों ने शाह के ऐलान का समर्थन किया है।यानी NDA के भीतर UCC पर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं।अब असली सवाल बिहार पर आकर टिकता है…अगर BJP 2029 से पहले अपने सभी NDA शासित राज्यों में UCC लागू करना चाहती है, तो बिहार का मॉडल क्या होगा? क्या BJP और JDU) के बीच बातचीत से कोई साझा रास्ता निकलेगा? क्या UCC के ड्राफ्ट में ऐसे प्रावधान होंगे जिन पर JDU) सहमत हो सके? या फिर बिहार में UCC का मुद्दा NDA के दोनों सहयोगियों के बीच बड़ा राजनीतिक सवाल बन जाएगा?
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फिलहाल इतना साफ है कि अमित शाह के 21 राज्यों वाले ऐलान के बाद बिहार सबसे अहम राज्यों में से एक बनकर सामने आया है। क्योंकि यहां लड़ाई सिर्फ UCC के कानून की नहीं है…सवाल है BJP का राष्ट्रीय एजेंडा और उसके सहयोगी की राज्य वाली राजनीति, दोनों एक साथ कैसे चलेंगे? और अब सबकी नजर इस बात पर है कि BJP और JDU) की बातचीत के बाद UCC पर बिहार की तस्वीर क्या बनती है।








