नई दिल्ली, 12 सितंबर 2026
पाकिस्तान की नजर इस वक्त भारत पर है…
क्योंकि पाकिस्तान एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन में शामिल होना चाहता है…
जिसकी बैठक इस समय भारत में हो रही है!
हम बात कर रहे हैं BRICS की…
और सबसे बड़ा सवाल है —
क्या पाकिस्तान को BRICS में एंट्री मिलेगी?
या फिर…
भारत के विरोध के कारण पाकिस्तान का सपना अधूरा रह जाएगा?
दरअसल, पाकिस्तान ने साल 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन किया था।
पाकिस्तान की कोशिश है कि उसे दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के इस मंच में जगह मिल जाए।
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी, बाद में दक्षिण अफ्रीका भी इसमें शामिल हुआ।
अब इस समूह का विस्तार हो चुका है और कई नए देश भी इससे जुड़े हैं।
भारत इस समय वर्ष 2026 में BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है।
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यही वजह है कि एक बार फिर पाकिस्तान की BRICS सदस्यता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान को उम्मीद है कि चीन और रूस उसकी सदस्यता का समर्थन कर सकते हैं।
लेकिन पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती है—भारत का रुख।
BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए सदस्य देशों के बीच सहमति जरूरी होती है।
ऐसे में अगर भारत पाकिस्तान की सदस्यता का समर्थन नहीं करता…
तो पाकिस्तान की राह मुश्किल हो सकती है।
रिपोर्टों के अनुसार पाकिस्तान की सदस्यता की कोशिश फिलहाल भारत के विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ पाई है। ,,,
अब सवाल है कि…
पाकिस्तान आखिर BRICS में शामिल क्यों होना चाहता है?
इसकी सबसे बड़ी वजह है पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था।
पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक संकट और विदेशी वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी चुनौतियों से जूझता रहा है।
BRICS में शामिल होने से पाकिस्तान को व्यापार, निवेश और दूसरे उभरते देशों के साथ आर्थिक सहयोग के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
पाकिस्तान ने BRICS से जुड़े New Development Bank में भी हिस्सेदारी लेने के लिए कदम उठाए हैं और रिपोर्टों में करीब 580 मिलियन डॉलर के निवेश का जिक्र किया गया है। लेकिन यहां एक और बड़ा सवाल खड़ा होता है
क्या चीन और रूस का समर्थन पाकिस्तान को BRICS में पहुंचाने के लिए काफी होगा?
जवाब है—जरूरी नहीं।
क्योंकि सदस्यता के मामले में सिर्फ एक या दो देशों का समर्थन पर्याप्त नहीं होता।
अगर सभी सदस्य सहमत नहीं होते, तो पाकिस्तान की एंट्री रुक सकती है।
यानी…
चीन साथ हो सकता है…
रूस समर्थन कर सकता है…
लेकिन पाकिस्तान की नजर आखिरकार भारत के फैसले पर ही रहेगी!
और यही इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू है।
एक तरफ नई दिल्ली में BRICS की बैठक…
दूसरी तरफ पाकिस्तान की सदस्यता की इच्छा…
और बीच में भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण रिश्ते!
अब देखना होगा—
क्या भविष्य में भारत अपना रुख बदलेगा?
क्या चीन और रूस पाकिस्तान के लिए दबाव बनाएंगे?
या फिर…
BRICS का दरवाजा पाकिस्तान के लिए बंद ही रहेगा?
सबसे बड़ा सवाल यही है-
क्या पाकिस्तान BRICS में शामिल होगा…या भारत का विरोध उसके सपने को रोक देगा?








