नई दिल्ली 10 सितंबर / नई दिल्ली में होने वाली BRICS की बैठक इस बार बेहद खास होने वाली है। क्योंकि एक मंच पर होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। तीन बड़े नेता और पूरी दुनिया की नजर नई दिल्ली पर! खास तौर पर अमेरिका और पाकिस्तान की! क्योंकि मोदी और पुतिन के बीच डिफेंस को लेकर बड़ी बातचीत हो सकती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की जमकर चर्चा हुई थी । अब सवाल है, क्या S-400 के बाद भारत की नजर S-500 पर है? हालांकि S-500 को लेकर अभी कोई आधिकारिक डील सामने नहीं आई है। लेकिन मोदी-पुतिन की मुलाकात में रक्षा सहयोग अहम मुद्दा हो सकता है। अब सवाल, आखिर BRICS क्या है? BRICS दुनिया के बड़े उभरते देशों का एक महत्वपूर्ण समूह है। B यानी ब्राजील, R यानी रूस, I यानी भारत, C यानी चीन और S यानी दक्षिण अफ्रीका। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी।

साल 2009 में पहला BRIC शिखर सम्मेलन हुआ। फिर दक्षिण अफ्रीका शामिल हुआ और BRIC बन गया BRICS। आज इस समूह का विस्तार हो चुका है। ईरान, मिस्र, इथियोपिया, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसका हिस्सा हैं। लेकिन इस बैठक की सबसे बड़ी चर्चा मोदी और जिनपिंग की मुलाकात है। क्योंकि साल 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में भारी तनाव आ गया। अब अगर मोदी और जिनपिंग एक टेबल पर बैठते हैं तो बात हो सकती है LAC पर शांति की। सीमा विवाद की। तनाव कम करने की। और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की।
भारत के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है सीमा की सुरक्षा। भारत बातचीत चाहता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं! अब बात मोदी और पुतिन की। भारत और रूस दशकों पुराने दोस्त हैं। रक्षा से लेकर ऊर्जा तक दोनों देशों की साझेदारी मजबूत है। भारत के पास रूसी S-400 है। सुखोई विमान हैं। और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल में भी रूस का सहयोग रहा है। ऐसे में पुतिन की भारत यात्रा बेहद महत्वपूर्ण है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और नई तकनीक बातचीत के बड़े मुद्दे हो सकते हैं। S-500 पर चर्चा होगी या नहीं, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन भारत की एयर डिफेंस क्षमता जरूर बड़ी चर्चा का विषय है।

इस बैठक में ईरान के राष्ट्रपति की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ईरान के अलावा BRICS के कई बड़े नेता नई दिल्ली पहुंच सकते हैं। यानी नई दिल्ली में दुनिया की कई बड़ी ताकतें एक साथ होंगी। और सवाल यही है, क्या यह बैठक दुनिया की राजनीति का नया समीकरण बनाएगी? क्या गलवान के बाद भारत और चीन के रिश्तों में नई शुरुआत होगी? क्या मोदी और पुतिन की मुलाकात से भारत-रूस की दोस्ती और मजबूत होगी? और क्या भारत की सुरक्षा को लेकर कोई बड़ा फैसला होगा? 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली BRICS की यह बैठक सिर्फ एक सम्मेलन नहीं है। बल्कि दुनिया की राजनीति के लिए एक बड़ा संदेश हो सकती है!








