हर साल बिहार में बाढ़ आती है…हर साल हजारों परिवार तबाही झेलते हैं…और हर साल सरकार राहत और बचाव के बड़े-बड़े दावे करती है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर इतने सालों बाद भी बिहार की जनता को बाढ़ के कहर से बचाने के लिए बीजेपी-एनडीए सरकार की तैयारी आखिर कहां है? नेपाल और झारखंड में लगातार हो रही बारिश के बाद बिहार की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। गांवों में पानी घुसने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित जगह, खाने-पीने और जरूरी सामान का संकट खड़ा हो गया है। हालात बिगड़ने के बाद अब सरकार सक्रिय नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे किया और राहत एवं बचाव कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द मदद पहुंचाई जाए और जान-माल की सुरक्षा में कोई लापरवाही न हो।

सबसे बड़ा सवाल है की बिहार में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। फिर आखिर हर साल पानी बढ़ने के बाद ही सरकार की तैयारी और राहत व्यवस्था क्यों दिखाई देती है?इसी बीच केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी वैशाली के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने हालात का जायजा लिया और प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि राहत सामग्री और मदद को लेकर किसी को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।
सरकार के नेताओं के दौरों और आश्वासनों के बीच विपक्ष ने अब बीजेपी-एनडीए सरकार को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी राघोपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे और सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए।तेजस्वी यादव का आरोप है कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए सरकार की तरफ से पर्याप्त कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि सरकार सिर्फ दावे कर रही है, जबकि जमीन पर पीड़ित लोग मुश्किलों से जूझ रहे हैं।

अब बिहार की बाढ़ पर सियासत भी तेज हो गई है। एक तरफ सरकार राहत और बचाव कार्यों के दावे कर रही है…सम्राट चौधरी हवाई सर्वे कर रहे हैं…चिराग पासवान प्रभावित इलाकों में पहुंचकर भरोसा दिला रहे हैं।लेकिन दूसरी तरफ तेजस्वी यादव सरकार की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।इन नेताओं के दौरों के बीच सबसे बड़ा सवाल बिहार की उस जनता का है, जो बाढ़ के संकट से जूझ रही है। जनता को सिर्फ सर्वे और आश्वासन नहीं, जमीन पर राहत चाहिए।क्योंकि सवाल अब सिर्फ बाढ़ का नहीं है…सवाल सरकार की तैयारी का है। हर साल बिहार डूबता है…लेकिन आखिर सरकार की व्यवस्था कब जागेगी?








